Thursday, April 16, 2009

daag dehlvi ki shayyiri

इस अदा से वो वफ़ा करते हैं
कोई जाने कि वफ़ा करते हैं
हमको छोड़ोगे तो पछताओगे
हँसने वालों से हँसा करते हैं
ये बताता नहीं कोई मुझको
दिल जो आ जाए तो क्या करते हैं
हुस्न का हक़ नहीं रहता बाक़ी
हर अदा में वो अदा करते हैं
किस क़दर हैं तेरी आँखे बेबाक
इन से फ़ित्ने भी हया करते हैं
इस लिए दिल को लगा रक्खा है
इस में दिल को लगा रक्खा है
'दाग़' तू देख तो क्या होता है
जब्र पर जब्र किया करते हैं

No comments:

Post a Comment

wel come