Thursday, April 16, 2009

muzaffar warsi ki shayyiri

मेरी जिंदगी किसी और की, मेरे नाम का कोई और है
मेरा अक्स है सर-ए-आइना, पस-ए-आईना कोई और है
मेरी धडकनों मैं है छाप सी, यें जुदाई भी है मिलाप सी
मुझे कया पता, मेरे दिल बता, मेरे साथ कया कोई और है
ना गए दिनों को खबर मेरी, ना शरीक-ए-हाल नज़र तेरी
तेरे देस में, मेरे भेष में, कोई और था कोई और है
वो मेरी तरफ निगरान रहे, मेरा धयान जाने कहाँ रहे
मेरी आँख में कई सूरतें, मुझे चाहता कोई और है

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