Monday, June 1, 2009

nasir kazmi ki shayyiri

आज तो बे_सबब उदास है जी
इश्क होता तो कोई बात भी थी
जलता फिरता हूँ क्यूँ दो_पहरों में
जाने क्या चीज़ खो गई मेरी
वहीं फिरता हूँ मैं भी खाक़ बसर
इस भरे शहर में है एक गली
छुपता फिरता है इश्क दुनिया से
फेलाती जा रही है रुसवाई
हम_नशीं क्या कहूँ के वो क्या है
छोड़ ये बात नींद उड़ने लगी
आज तो वो भी कुछ खामोश सा था
मैंने भी उसे कोई बात की
एक दम उसके हाथ चूम लिए
ये मुझे बैठे बैठे क्या सूझी
तू जो इतना उदास है 'नासिर'
तुझे क्या हो गया बता तो सही

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