बड़े मुख्तसर से हरूफ में मुझे गहरी बात बता गया
के वो ख्वाब सा कोई शख्स था जो सहर से पहले जगा गया
किसी मेहरबान की दुआओं से ये सफर तमाम हुआ मेरा
जिन्हें रहबरी का गरूर था उन्हें रास्तों ने मिटा दिया
हमें असमान से गिला नही तेरी रहमतों पे यकीन है
जिन्हें जिंदगी ने शिकस्त दी किसी मोजोज़े ने बचा लिया
हमें जिंदा रहने का हौसला तेरी आरजू ने अता किया
बड़े गहरे ज़ख्म थे वक्त ने जिन्हें रफ्ता रफ्ता मिटा दिया
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