Tuesday, June 2, 2009

unknown

पहले कुछ देर चरागों में नज़र आता है
वोह चेहरा मेरी आंखों में नज़र आता है
इक ज़माना हुआ बिछडे उससे लेकिन अब भी
रह चलते हुए लोगों में नज़र आता है
तितलियाँ वरना कहाँ ढूंढती उसको जा कर
उसका एहसान है के फूलों में नज़र आता है
दिल भी साथ उसके धड़कता हो ज़रूरी तो नही
हाथ जिसका मेरे हाथों में नज़र आता है
यह जो बदती ही चली जाती है अन्दर की घुटन
ऐसा माहोल तो बागों में नज़र आता है
जाने क्या है के सुमंदर ही सुमंदर हर सू
पिछले कुछ रोज़ से ख्वाबों में नज़र आता है
मुझको आगोश में ले लेती है तन्हाई 'हसन'
चाँद जब पेड़ की बाहों में नज़र आता है

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