मयकदा था चांदनी थी मैं न था
इक मुजस्सम बेखुदी थी मैं न था
इश्क जब दम तोड़ता था तुम न थे
मौत जब सर धुन रही थी मैं न था
तूर पर छेड़ा था जिसने आप को
वो मेरी दीवानगी थी मैं न था
मैकदे के मोड़ पर रुकती हुई
मुद्दतों की तिशनगी थी मैं न था
मैं और उस गुन्चादाहन की आरजू
आरजू की सादगी थी मैं न था
गेसूओं के साए में आराम-कश्
सर-बरहना जिंदगी थी मैं न था
दैर-ओ-काबा में 'अदम' हैरत-फरोश
दो जहाँ की बद्ज़नी थी मैं न था
nikala mujhko zannat se fareb-e-zindgi de kar.............. diya phir shaunq zannat ka ye hairani nahi jaati.......
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Thursday, June 4, 2009
Saturday, May 30, 2009
Friday, May 29, 2009
Thursday, May 21, 2009
Sunday, May 10, 2009
Tuesday, April 28, 2009
adam ki shayyiri
मुझे तौबा का पूरा अजन[reward] मिलता है उसी साअत
कोई ज़ुहराज़बीं पीने पे जब मजबूर करता है
कोई ज़ुहराज़बीं पीने पे जब मजबूर करता है
adam ki shayyiri
मुहब्बत खुबसूरत ख्वाहिशों की दीपमाला है
यें वो अकमील[देश] है जिसमें उजाला ही उजाला है
यें वो अकमील[देश] है जिसमें उजाला ही उजाला है
Saturday, April 25, 2009
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