जिस्म के नेजे पर[on spear head] जो रखा है
उस मेरे सर में जाने क्या क्या है
बुत बनाया मेरे हुनर ने मुझे
मेरे हाथों ने मुझको तोडा है
बस्तियां उजड़ी हैं तो सनाटा
मेरी आवाज़ में समाया है
मैं भी बे-जड़[without roots] का पेड़[tree] हूँ शायद
मुझको भी डर हवा से लगता है
शहर में कुछ इमारतों के सिवा
अब मेरा कौन मिलने वाला है
कहने-सुनने को कुछ नहीं बाक़ी
मिलना-जुलना अजब सा लगता है
nikala mujhko zannat se fareb-e-zindgi de kar.............. diya phir shaunq zannat ka ye hairani nahi jaati.......
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Thursday, June 4, 2009
Friday, May 29, 2009
muntazir saleem ki shayyiri
जिस्म के नेजे[on spear head] पर जो रखा है
उस मेरे सर में जाने क्या क्या है
बुत बनाया मेरे हुनर ने मुझे
मेरे हाथों ने मुझको तोडा है
बस्तियां उजड़ी हैं तोह सन्नाटा
मेरी आवाज़ में समाया है
मैं भी बे-जड़ का पेड़ हूँ शायद
मुझको भी डर हवा से लगता है
शहर में कुछ इमारतों के सिवा
अब मेरा कौन मिलने-वाला है
कहने-सुनने को कुछ नहीं बाकी
मिलना-जुलना अजब सा लगता है
उस मेरे सर में जाने क्या क्या है
बुत बनाया मेरे हुनर ने मुझे
मेरे हाथों ने मुझको तोडा है
बस्तियां उजड़ी हैं तोह सन्नाटा
मेरी आवाज़ में समाया है
मैं भी बे-जड़ का पेड़ हूँ शायद
मुझको भी डर हवा से लगता है
शहर में कुछ इमारतों के सिवा
अब मेरा कौन मिलने-वाला है
कहने-सुनने को कुछ नहीं बाकी
मिलना-जुलना अजब सा लगता है
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