दर्द-ए-दिल थाम के सहते है, हम तो चुप ही है ?
लोग कया कया नहीं कह्ते है, हम तो चुप ही है ?
आप क्यूँ दिल के तड़पने का बुरा मान गए !
आप से कुछ नहीं कह्ते हैं, हम तो चुप ही है ?
हम खतावार नहीं है, दिल के बहक जाने का !
ये कागार आप ही ढाते हैं, हम तो चुप ही है ?
nikala mujhko zannat se fareb-e-zindgi de kar.............. diya phir shaunq zannat ka ye hairani nahi jaati.......
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Monday, June 8, 2009
gulaab ki shayyiri
दिल तो हमने ही लगाया है, आप चुप क्यूँ हैं ?
दांव ये हमने गंवाया है, आप चुप क्यूँ हैं ?
लोग कया कया नहीं कह्ते है हमें दुनीया में !
आप का नाम भी आया है, आप चुप क्यूँ हैं ?
यह तो कहिये की नज़र क्यूँ है खोई खोई हुई !
भेद कया हमसे छिपाया है, आप चुप क्यूँ हैं ?
दांव ये हमने गंवाया है, आप चुप क्यूँ हैं ?
लोग कया कया नहीं कह्ते है हमें दुनीया में !
आप का नाम भी आया है, आप चुप क्यूँ हैं ?
यह तो कहिये की नज़र क्यूँ है खोई खोई हुई !
भेद कया हमसे छिपाया है, आप चुप क्यूँ हैं ?
Sunday, June 7, 2009
gulaab ki shayyiri
जिनदगी है की हरीक हाल में कट जाती है
आपने दिल से भुलाया है,तो कोई बात नही
आप को याद हमारी भी तो आती होगी
नाम मुँह पर नही आया है, कोई बात नही
हमको खुशबु तो उन आँखों की मिली है हरदम
प्यार अगर मिल नही पाया है, कोई बात नही
उनंके नाखून काटने की है चर्चा घर घर
हमने सर भी जो कटाया है, कोई बात नही
फिर बहरे आयेंगी फिर बाग़ में फूलेंगे "गुलाब"
जी तो ऐसे ही भर आया है, कोई बात नही
आपने दिल से भुलाया है,तो कोई बात नही
आप को याद हमारी भी तो आती होगी
नाम मुँह पर नही आया है, कोई बात नही
हमको खुशबु तो उन आँखों की मिली है हरदम
प्यार अगर मिल नही पाया है, कोई बात नही
उनंके नाखून काटने की है चर्चा घर घर
हमने सर भी जो कटाया है, कोई बात नही
फिर बहरे आयेंगी फिर बाग़ में फूलेंगे "गुलाब"
जी तो ऐसे ही भर आया है, कोई बात नही
Friday, June 5, 2009
gulaab ki shayyiri
दर्द-यें-दिल थाम के सहते है, हम तो चुप ही है ?
लोग कया कया नहीं कहते है, हम तो चुप ही है ?
आप क्यूं दिल के तड़पने का बुरा मान गये !
आप से कुछ नहीं कहते हैं, हम तो चुप ही है ?
हम खतावार नहीं है, दिल के बहक जाने का !
यें कागार आप ही ढाते हैं, हम तो चुप ही है ?
लोग कया कया नहीं कहते है, हम तो चुप ही है ?
आप क्यूं दिल के तड़पने का बुरा मान गये !
आप से कुछ नहीं कहते हैं, हम तो चुप ही है ?
हम खतावार नहीं है, दिल के बहक जाने का !
यें कागार आप ही ढाते हैं, हम तो चुप ही है ?
gulaab ki shayyiri
दिल तो हमने ही लगाया है, आप चुप क्यूं हैं ?
दांव यें हमने गंवाया है, आप चुप क्यूं हैं ?
लोग कया कया नहीं कहते है हमें दुनिया मैं !
आप का नाम भी आया है, आप चुप क्यूं हैं ?
यह तो कहिये की नज़र क्यूं है खोई खोई हुई !
भेद कया हमसे छिपाया है, आप चुप क्यूं हैं ?
दांव यें हमने गंवाया है, आप चुप क्यूं हैं ?
लोग कया कया नहीं कहते है हमें दुनिया मैं !
आप का नाम भी आया है, आप चुप क्यूं हैं ?
यह तो कहिये की नज़र क्यूं है खोई खोई हुई !
भेद कया हमसे छिपाया है, आप चुप क्यूं हैं ?
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