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Sunday, May 31, 2009

shakeel badayuni ki shayyiri

कैसे कह दूँ की मुलाकात नहीं होती
रोज़ मिलते हैं मगर बात नहीं होती
आप लिलाह देखा करें आईना कभी
दिल का जाना कोई बड़ी बात नहीं होती
छुप के रोता हूँ तेरी याद में दुनिया भर से
कब मेरी आँख से बरसात नहीं होती
हाल-ऐ-दिल पूछने वाले तेरी दुनिया में कभी
दिन तो होता है मगर रात नहीं होती
जब भी मिलते हैं तो कह्ते है, 'कैसे हो "शकील"'
इस से आगे तोह कोई बात नहीं होती

Friday, May 29, 2009

shakeel badayuni ki shayyiri

ज़ौक़-ऐ-सितम जुनून की हदों से गुज़र गया
कम-ज़र्फ़ जिंदा रह गए, इन्सान मर गया
ग़म खाना-ऐ-जहाँ में किसे जुर्रत-ऐ-कयाम
मेरा ही हौसला था, दो दिन ठहर गया
है शिद्दत-ऐ-खुलूस एक जुर्म-ऐ-आशिकी
परवाना जल के शम्मा को बदनाम कर गया
बैठे हैं आज आईना-ऐ-जान ले के वो
अब जानिए के नज़्म-ऐ-दो आलम संवर गया
लिल्लाह ! आप मुझसे मुहब्बत न कीजिये
दो रोज़ ही में आपका चेहरा उतर गया
पहले तोह ज़िन्दगी की तमन्ना थी इश्क में
अब ढूँढ़ता हूँ मैं, मेरा कातिल किधर गया
रह कर तिलिस्म-ऐ-खाना-ऐ-हस्ती में ऐ 'शकील'
तोह मैं ख़ुद अपने ही साए से डर गया

Tuesday, April 28, 2009

shakeel badayuni ki shayyiri

आप खुद ही सोचिये मैं हूँ उन्हें कितना अज़ीज़
वो ख़ुदा को छोड़कर मेरी कसम खाने लगे

shakeel badayuni ki shayyiri

जो अज़खुद[अपने-आप] ना बदला निज़ामे-दो-आलम
तेरी ज़ुल्फ़ से बरहमी मांग लूँगा

wel come