कैसे कह दूँ की मुलाकात नहीं होती
रोज़ मिलते हैं मगर बात नहीं होती
आप लिलाह न देखा करें आईना कभी
दिल का आ जाना कोई बड़ी बात नहीं होती
छुप के रोता हूँ तेरी याद में दुनिया भर से
कब मेरी आँख से बरसात नहीं होती
हाल-ऐ-दिल पूछने वाले तेरी दुनिया में कभी
दिन तो होता है मगर रात नहीं होती
जब भी मिलते हैं तो कह्ते है, 'कैसे हो "शकील"'
इस से आगे तोह कोई बात नहीं होती
nikala mujhko zannat se fareb-e-zindgi de kar.............. diya phir shaunq zannat ka ye hairani nahi jaati.......
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Sunday, May 31, 2009
Friday, May 29, 2009
shakeel badayuni ki shayyiri
ज़ौक़-ऐ-सितम जुनून की हदों से गुज़र गया
कम-ज़र्फ़ जिंदा रह गए, इन्सान मर गया
ग़म खाना-ऐ-जहाँ में किसे जुर्रत-ऐ-कयाम
मेरा ही हौसला था, दो दिन ठहर गया
है शिद्दत-ऐ-खुलूस एक जुर्म-ऐ-आशिकी
परवाना जल के शम्मा को बदनाम कर गया
बैठे हैं आज आईना-ऐ-जान ले के वो
अब जानिए के नज़्म-ऐ-दो आलम संवर गया
लिल्लाह ! आप मुझसे मुहब्बत न कीजिये
दो रोज़ ही में आपका चेहरा उतर गया
पहले तोह ज़िन्दगी की तमन्ना थी इश्क में
अब ढूँढ़ता हूँ मैं, मेरा कातिल किधर गया
रह कर तिलिस्म-ऐ-खाना-ऐ-हस्ती में ऐ 'शकील'
तोह मैं ख़ुद अपने ही साए से डर गया
कम-ज़र्फ़ जिंदा रह गए, इन्सान मर गया
ग़म खाना-ऐ-जहाँ में किसे जुर्रत-ऐ-कयाम
मेरा ही हौसला था, दो दिन ठहर गया
है शिद्दत-ऐ-खुलूस एक जुर्म-ऐ-आशिकी
परवाना जल के शम्मा को बदनाम कर गया
बैठे हैं आज आईना-ऐ-जान ले के वो
अब जानिए के नज़्म-ऐ-दो आलम संवर गया
लिल्लाह ! आप मुझसे मुहब्बत न कीजिये
दो रोज़ ही में आपका चेहरा उतर गया
पहले तोह ज़िन्दगी की तमन्ना थी इश्क में
अब ढूँढ़ता हूँ मैं, मेरा कातिल किधर गया
रह कर तिलिस्म-ऐ-खाना-ऐ-हस्ती में ऐ 'शकील'
तोह मैं ख़ुद अपने ही साए से डर गया
Tuesday, April 28, 2009
shakeel badayuni ki shayyiri
आप खुद ही सोचिये मैं हूँ उन्हें कितना अज़ीज़
वो ख़ुदा को छोड़कर मेरी कसम खाने लगे
वो ख़ुदा को छोड़कर मेरी कसम खाने लगे
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