Showing posts with label मुज़फ्फर हसन आली. Show all posts
Showing posts with label मुज़फ्फर हसन आली. Show all posts

Friday, May 29, 2009

muzaffar hasan aali ki shayyiri

दोस्तों से गैरों की दुश्मनी से था
मेरा मुकाबिला बस अपनी जात ही से था
किसी भी मोड़ पे रुकना कब गवारा था मुझे
मेरी अना का ताल्लुक फ़क़त मुझी से था
तमाम उमर मैं ढूंढता रहा रफाकात को
मैं शर्मसार बहुत उसकी दोस्ती से था
दिल--निगाह भी आमादा--सुजूद[in prostation] रहे
मेरी जबीं का ताल्लुक भी बंदगी से था
थे बद-गुमां सभी मेरी जात--वाहिद से
मगर सुकून भी उस शहर में मुझी से था

wel come