vo kuch iss ada se milta hai
dard jaise dawa se milta hai
be-muravvat sahi pa' kya kijiye
dil ussi bewaffa se milta hai
phail jaati hai aag jangle mein
jab bhi shola hawa se milta hai
hai vo aaludgi fazaon mein
zehar humko hawa se milta hai
usski athkheliyon ka kya kehna
khwab mein bhi ada se milta hai
har kali ko mijaaz sharmila
teri sharm-o-hayya se milta hai
zindgi mein sukoon mujhko 'zaheen'
jaane kiski dua se milta hai
nikala mujhko zannat se fareb-e-zindgi de kar.............. diya phir shaunq zannat ka ye hairani nahi jaati.......
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Sunday, August 23, 2009
meri nakaami
dil mein nakaam hasratein le kar
apne seene mein chahatein le kar
jaane kitni umange saath liye
jaane kitne hi khwab saath liye
apni manzil talaash karne ko
chal diye besabab usse paane
vaada ussne kiya tha milne ka
vo chali aayi mujhse milne; magar
apne dil mein dabaye pyar mera
usska milna bhi aisa milna tha
gaiir se jaise koi milta hai
sochta tha ki uss se mil ke sabhi
zakhm apne tamaam bhar lunga
dil ka har dard ab milta lunga
vo mera zakhm bhar na paayi koi
dard dil ka mita na paayi koi
darr lage hai samaj se ussko
jhoothe reeti-riwaaz se ussko
aaj samjha hun pyar ki aukaat
pyar darta hai duniyadaari se
main ye kehta hun tumse ae logo
darr hai dil mein samaj tumko
jhoothe reeti-riwaaz ka tumko
toh ye bhoole se pyar mat karna
kyunki dil tuut'te hain pyar bhare
aur ab kya sunaaun main tumko
main chala aaya apne khwab liye
apni nakaam hasratein le kar
ussko illzam bhi toh doon kaise
vo mera pyar hai; meri jaan hai
vo meri dhadkanon mein; meri saanson mein
mere dil mein basi rahegi sada
jaise khushboo basi hai phoolon mein
apne seene mein chahatein le kar
jaane kitni umange saath liye
jaane kitne hi khwab saath liye
apni manzil talaash karne ko
chal diye besabab usse paane
vaada ussne kiya tha milne ka
vo chali aayi mujhse milne; magar
apne dil mein dabaye pyar mera
usska milna bhi aisa milna tha
gaiir se jaise koi milta hai
sochta tha ki uss se mil ke sabhi
zakhm apne tamaam bhar lunga
dil ka har dard ab milta lunga
vo mera zakhm bhar na paayi koi
dard dil ka mita na paayi koi
darr lage hai samaj se ussko
jhoothe reeti-riwaaz se ussko
aaj samjha hun pyar ki aukaat
pyar darta hai duniyadaari se
main ye kehta hun tumse ae logo
darr hai dil mein samaj tumko
jhoothe reeti-riwaaz ka tumko
toh ye bhoole se pyar mat karna
kyunki dil tuut'te hain pyar bhare
aur ab kya sunaaun main tumko
main chala aaya apne khwab liye
apni nakaam hasratein le kar
ussko illzam bhi toh doon kaise
vo mera pyar hai; meri jaan hai
vo meri dhadkanon mein; meri saanson mein
mere dil mein basi rahegi sada
jaise khushboo basi hai phoolon mein
Wednesday, April 15, 2009
buniyad hussain ''zaheen'' bikaneri ki shayyiri
लोग ये कहते थे इक लम्बा सफ़र है ज़िन्दगी
मौत को देखा तो समझे मुख्तसर है ज़िन्दगी
खून से लिथड़ी हुई लाशें हैं देखो हर तरफ़
ज़ुल्म के इस दौर में फिर दांव पर है ज़िन्दगी
हिम्मतो - जुरअत ही से मिलता है मंजिल का सुराग़
हौसला जीने का हो तो राहबर है ज़िन्दगी
तेरे हर इक गाम पर हैं ठोकरें ही ठोकरें
क्या तुझे एहसास है; तुझको ख़बर है ज़िन्दगी
भूक; लाचारी; मुसीबत; मुफ़लिसी है मुल्क में
आज हम आज़ाद हैं और दर - ब - दर है ज़िन्दगी
क्या सुनाउं मैं तुम्हें टूटे दिलों की दास्ताँ
मुख्तलिफ़ राहों में इक तन्हा सफ़र है ज़िन्दगी
हाय ! किन आँखों से देखें हम ये मंज़र ऐ ''ज़हीन''
टूटती साँसें हैं और बे - बालो - पर है ज़िन्दगी
Ref : असरे - क़लम
मौत को देखा तो समझे मुख्तसर है ज़िन्दगी
खून से लिथड़ी हुई लाशें हैं देखो हर तरफ़
ज़ुल्म के इस दौर में फिर दांव पर है ज़िन्दगी
हिम्मतो - जुरअत ही से मिलता है मंजिल का सुराग़
हौसला जीने का हो तो राहबर है ज़िन्दगी
तेरे हर इक गाम पर हैं ठोकरें ही ठोकरें
क्या तुझे एहसास है; तुझको ख़बर है ज़िन्दगी
भूक; लाचारी; मुसीबत; मुफ़लिसी है मुल्क में
आज हम आज़ाद हैं और दर - ब - दर है ज़िन्दगी
क्या सुनाउं मैं तुम्हें टूटे दिलों की दास्ताँ
मुख्तलिफ़ राहों में इक तन्हा सफ़र है ज़िन्दगी
हाय ! किन आँखों से देखें हम ये मंज़र ऐ ''ज़हीन''
टूटती साँसें हैं और बे - बालो - पर है ज़िन्दगी
Ref : असरे - क़लम
buniyad hussain ''zaheen'' bikaneri ki shayyiri
ज़िन्दगी का सफ़र हसीन रहा
ये तमाशा तो बेहतरीन रहा
कट रहा था जो गाँव का बरगद
गाँव कैसे तमाशबीन रहा
तू ही था और ना तेरा साया था
कैसे कह दूँ सफ़र हसीन रहा
थोड़ा खिंचते ही देख टूट गया
दिल का रिश्ता बड़ा महीन रहा
ये तमाशा तो बेहतरीन रहा
कट रहा था जो गाँव का बरगद
गाँव कैसे तमाशबीन रहा
तू ही था और ना तेरा साया था
कैसे कह दूँ सफ़र हसीन रहा
थोड़ा खिंचते ही देख टूट गया
दिल का रिश्ता बड़ा महीन रहा
buniyad hussain ''zaheen'' bikaneri ki shayyiri
कभी दर्दे - दिल कि दवा चाहता हूँ
कभी रोग इससे सिवा चाहता हूँ
अरे बेवफा सुन मैं क्या चाहता हूँ
खता मैंने कि है सजा चाहता हूँ
जिसे देख कर ज़ख्म दिल के हरे हों
उसे इक नज़र देखना चाहता हूँ
कभी रोग इससे सिवा चाहता हूँ
अरे बेवफा सुन मैं क्या चाहता हूँ
खता मैंने कि है सजा चाहता हूँ
जिसे देख कर ज़ख्म दिल के हरे हों
उसे इक नज़र देखना चाहता हूँ
Monday, April 13, 2009
buniyad hussain ''zaheen'' bikaneri ki shayyiri
सर ख़ुशी की ज़ीस्त में सौगात लेकर आएगा
जब कोई बच्चा नए जज़्बात लेकर आएगा
वक़्त जब मजबूरिये - हालात लेकर आएगा
खून में डूबे हुए दिन - रात लेकर आएगा
गम तेरी बर्बादियों का देख लेना एक दिन
जान पर मेरी कई सदमात लेकर आएगा
अब वो मेरे सहने - दिल में जब भी रक्खेगा क़दम
मेरे हिस्से की ख़ुशी भी साथ लेकर आएगा
मेरे ज़ख्मों को वो फिर से ताज़ा करने के लिए
बातों - बातों में पुरानी बात लेकर आएगा
हम ग़रीबों की दुआओं का नया बादल ''ज़हीन''
रहमतों की इक नयी बरसात लेकर आएगा
जब कोई बच्चा नए जज़्बात लेकर आएगा
वक़्त जब मजबूरिये - हालात लेकर आएगा
खून में डूबे हुए दिन - रात लेकर आएगा
गम तेरी बर्बादियों का देख लेना एक दिन
जान पर मेरी कई सदमात लेकर आएगा
अब वो मेरे सहने - दिल में जब भी रक्खेगा क़दम
मेरे हिस्से की ख़ुशी भी साथ लेकर आएगा
मेरे ज़ख्मों को वो फिर से ताज़ा करने के लिए
बातों - बातों में पुरानी बात लेकर आएगा
हम ग़रीबों की दुआओं का नया बादल ''ज़हीन''
रहमतों की इक नयी बरसात लेकर आएगा
buniyad hussain ''zaheen'' bikaneri ki shayyiri
नस्ले-आदम में सादगी भर दे
अब तो इन्सां में आजिज़ी भर दे
बिस्तरे -मर्ग पे जो लेटे हैं
उनकी साँसों में ज़िन्दगी भर दे
हम ग़रीबों के आशियानों में
मेरे मालिक तू रोशनी भर दे
भीगी - भीगी रहें मेरी पलकें
इनमें एहसास की नमी भर दे
फ़स्ले-गुल और मैं तही-दामन
मेरे दामन में भी ख़ुशी भर दे
अब तो सारा चमन शबाब पे है
पत्ते - पत्ते में सरखुशी भर दे
तेरे नगमे हों क्यूँ उदास ''ज़हीन''
इनकी रग - रग में शाइरी भर दे
Ref : असरे-क़लम
अब तो इन्सां में आजिज़ी भर दे
बिस्तरे -मर्ग पे जो लेटे हैं
उनकी साँसों में ज़िन्दगी भर दे
हम ग़रीबों के आशियानों में
मेरे मालिक तू रोशनी भर दे
भीगी - भीगी रहें मेरी पलकें
इनमें एहसास की नमी भर दे
फ़स्ले-गुल और मैं तही-दामन
मेरे दामन में भी ख़ुशी भर दे
अब तो सारा चमन शबाब पे है
पत्ते - पत्ते में सरखुशी भर दे
तेरे नगमे हों क्यूँ उदास ''ज़हीन''
इनकी रग - रग में शाइरी भर दे
Ref : असरे-क़लम
buniyad hussain ''zaheen'' bikaneri ki shayyiri
क्यूँ ज़माने पे ऐतबार करूँ
अपनी आँखों को अश्कबार करूँ
सिर्फ़ ख्वाबों पे ऐतबार करूँ
दिल ये कहता है तुझसे प्यार करूँ
मेरी रग-रग में है महक तेरी
मेरे चेहरे पे है चमक तेरी
मेरी आवाज़ में खनक तेरी
ज़र्रे - ज़र्रे में है धनक तेरी
क्यूँ न मैं तुझपे दिल निसार करूँ
दिल ये कहता है तुझसे प्यार करूँ
तुझपे कुरबां करूँ हयात मेरी
तुझसे रोशन है कायनात मेरी
बिन तेरे क्या है फिर बिसात मेरी
जाने कब होगी तुझसे बात मेरी
कब तलक दिल को बेक़रार करूँ
दिल ये कहता है तुझसे प्यार करूँ
मेरी आँखों की रोशनी तू है
मेरी साँसों की ताजगी तू है
मेरी रातों की चांदनी तू है
मेरी जां तू है ; ज़िन्दगी तू है
हर घड़ी तेरा इन्तिज़ार करूँ
दिल ये कहता है तुझसे प्यार करूं
तू ही उल्फ़त है ; तू ही चाहत है
अब फ़क़त तेरी ही ज़रूरत है
हसरतों की ये एक हसरत है
इश्क़ से बढ़के भी इबादत है?
तुझको ख्वाबों से क्यूँ फरार करूँ
दिल ये कहता है तुझसे प्यार करूँ
अपनी आँखों को अश्कबार करूँ
सिर्फ़ ख्वाबों पे ऐतबार करूँ
दिल ये कहता है तुझसे प्यार करूँ
मेरी रग-रग में है महक तेरी
मेरे चेहरे पे है चमक तेरी
मेरी आवाज़ में खनक तेरी
ज़र्रे - ज़र्रे में है धनक तेरी
क्यूँ न मैं तुझपे दिल निसार करूँ
दिल ये कहता है तुझसे प्यार करूँ
तुझपे कुरबां करूँ हयात मेरी
तुझसे रोशन है कायनात मेरी
बिन तेरे क्या है फिर बिसात मेरी
जाने कब होगी तुझसे बात मेरी
कब तलक दिल को बेक़रार करूँ
दिल ये कहता है तुझसे प्यार करूँ
मेरी आँखों की रोशनी तू है
मेरी साँसों की ताजगी तू है
मेरी रातों की चांदनी तू है
मेरी जां तू है ; ज़िन्दगी तू है
हर घड़ी तेरा इन्तिज़ार करूँ
दिल ये कहता है तुझसे प्यार करूं
तू ही उल्फ़त है ; तू ही चाहत है
अब फ़क़त तेरी ही ज़रूरत है
हसरतों की ये एक हसरत है
इश्क़ से बढ़के भी इबादत है?
तुझको ख्वाबों से क्यूँ फरार करूँ
दिल ये कहता है तुझसे प्यार करूँ
buniyad hussain ''zaheen'' bikaneri ki shayyiri
हैं भरम दिल का मोतबर रिश्ते
आज़माओ तो मुख्तसर रिश्ते
हो गए कितने दर - ब- दर रिश्ते
अपने ही खून में हैं तर रिश्ते
कल महकते थे घर के घर; लेकिन
बन गए आज दर्दे - सर रिश्ते
उनसे उम्मीद ही नहीं रक्खी
वरना रह जाते टूट कर रिश्ते
कम ही मिलते हैं इस ज़माने में
दर्द के; गम के; हमसफ़र रिश्ते
मैं इन्हें मरहमी समझता था
हैं नमक जैसे ज़ख्म पर रिश्ते
हैं ये तस्बीह के से दाने ''ज़हीन''
बिखरे - बिखरे से हैं मगर रिश्ते
Ref : असरे-क़लम
आज़माओ तो मुख्तसर रिश्ते
हो गए कितने दर - ब- दर रिश्ते
अपने ही खून में हैं तर रिश्ते
कल महकते थे घर के घर; लेकिन
बन गए आज दर्दे - सर रिश्ते
उनसे उम्मीद ही नहीं रक्खी
वरना रह जाते टूट कर रिश्ते
कम ही मिलते हैं इस ज़माने में
दर्द के; गम के; हमसफ़र रिश्ते
मैं इन्हें मरहमी समझता था
हैं नमक जैसे ज़ख्म पर रिश्ते
हैं ये तस्बीह के से दाने ''ज़हीन''
बिखरे - बिखरे से हैं मगर रिश्ते
Ref : असरे-क़लम
buniyad hussain ''zaheen'' bikaneri ki shayyiri
मेरे दिल की हर इक वफ़ा तू है
मेरी साँसों का सिलसिला तू है
मेरी धड़कन की इंतिहा तू है
जों महकती है वो दुआ तू है
आरज़ू तू है इल्तिजा तू है
मुझसे वाबस्ता है ख़ुशी तेरी
खुद से प्यारी है ज़िन्दगी तेरी
मेरे दिल में है रोशनी तेरी
दिल में रोशन है जों दुआ तू है
आरज़ू तू है इल्तिजा तू है
तेरी हर सांस पे इजारा है
तुझको हर सांस ने पुकारा है
तेरा गम ज़िन्दगी से प्यारा है
इस ज़माने में आसरा तू है
आरज़ू तू है इल्तिजा तू है
तेरा दिल हर घड़ी महकता रहे
तेरा चेहरा सदा दमकता रहे
देखकर तुझको दिल धड़कता रहे
बस दुआओं की इक दुआ तू है
आरज़ू तू है इल्तिजा तू है
प्यार का दिन है आओ प्यार करें
एक - दूजे पे दिल निसार करें
Ref : असरे-क़लम
मेरी साँसों का सिलसिला तू है
मेरी धड़कन की इंतिहा तू है
जों महकती है वो दुआ तू है
आरज़ू तू है इल्तिजा तू है
मुझसे वाबस्ता है ख़ुशी तेरी
खुद से प्यारी है ज़िन्दगी तेरी
मेरे दिल में है रोशनी तेरी
दिल में रोशन है जों दुआ तू है
आरज़ू तू है इल्तिजा तू है
तेरी हर सांस पे इजारा है
तुझको हर सांस ने पुकारा है
तेरा गम ज़िन्दगी से प्यारा है
इस ज़माने में आसरा तू है
आरज़ू तू है इल्तिजा तू है
तेरा दिल हर घड़ी महकता रहे
तेरा चेहरा सदा दमकता रहे
देखकर तुझको दिल धड़कता रहे
बस दुआओं की इक दुआ तू है
आरज़ू तू है इल्तिजा तू है
प्यार का दिन है आओ प्यार करें
एक - दूजे पे दिल निसार करें
Ref : असरे-क़लम
buniyad hussain ''zaheen'' bikaneri ki shayyiri
ज़मीन पर हैं क़दम ख्वाब आसमान के हैं
शिकस्ता पर हैं मगर होसले उड़ान के हैं
लबे -जहाँ पे कसीदे हमारी शान के हैं
तुझे खबर है कि हम कैसी आन -बान के हैं
तकान रोक न पायेगी रास्ता मेरा
ये मेरे होसले मोहताज कब तकान के हैं
फिसल न जाएँ कहीं पाँव फिर बुलंदी से
ज़रा संभल के चलो रास्ते ढलान के हैं
तेरी भवों कि तनावट को जानता हूँ मैं
ये तीर जितने हैं सारे तेरी कमान के हैं
ज़माने भर को बताने कि क्या ज़रुरत है
''ये मसअले तो तेरे -मेरे दरमियान के हैं
ये दौरे -शाम -ओ -सहर अस्ले-ज़िन्दगी कब है
ज़मीन वालो ये चक्कर तो आसमान के हैं
ज़बान वो जिसे कहते हैं आज सब उर्दू
''ज़हीन'' हम भी तो शैदा उसी ज़बान के हैं
Ref : असरे-क़लम
शिकस्ता पर हैं मगर होसले उड़ान के हैं
लबे -जहाँ पे कसीदे हमारी शान के हैं
तुझे खबर है कि हम कैसी आन -बान के हैं
तकान रोक न पायेगी रास्ता मेरा
ये मेरे होसले मोहताज कब तकान के हैं
फिसल न जाएँ कहीं पाँव फिर बुलंदी से
ज़रा संभल के चलो रास्ते ढलान के हैं
तेरी भवों कि तनावट को जानता हूँ मैं
ये तीर जितने हैं सारे तेरी कमान के हैं
ज़माने भर को बताने कि क्या ज़रुरत है
''ये मसअले तो तेरे -मेरे दरमियान के हैं
ये दौरे -शाम -ओ -सहर अस्ले-ज़िन्दगी कब है
ज़मीन वालो ये चक्कर तो आसमान के हैं
ज़बान वो जिसे कहते हैं आज सब उर्दू
''ज़हीन'' हम भी तो शैदा उसी ज़बान के हैं
Ref : असरे-क़लम
buniyad hussain ''zaheen'' bikaneri ki shayyiri
उमीद मंजिले - मक़सूद की बहुत कम है
तेरे मिज़ाज में आवारगी बहुत कम है
नए ज़माने के इंसान क्या हुआ तुझ को
तेरे सुलूक में क्यूँ सादगी बहुत कम है
वो जिनसे ज़ीस्त की हर एक राह रोशन थी
उन्हीं चिरागों में अब रोशनी बहुत कम है
तमाम रिश्तों की बुनियाद है फ़क़त एहसास
मगर दिलों में तो एहसास ही बहुत कम है
जो सायादार कभी मौसमे-बहार में था
उसी दरख्त का साया अभी बहुत कम है
मैं अपनी उम्र की तुझको दुआएं दूँ कैसे
मुझे खबर है मेरी ज़िन्दगी बहुत कम है
बदलते दौर की ज़द में है गुलसितां का निजाम
''ज़हीन'' फूलों में अब ताजगी बहुत कम है
Ref : असरे क़लम
तेरे मिज़ाज में आवारगी बहुत कम है
नए ज़माने के इंसान क्या हुआ तुझ को
तेरे सुलूक में क्यूँ सादगी बहुत कम है
वो जिनसे ज़ीस्त की हर एक राह रोशन थी
उन्हीं चिरागों में अब रोशनी बहुत कम है
तमाम रिश्तों की बुनियाद है फ़क़त एहसास
मगर दिलों में तो एहसास ही बहुत कम है
जो सायादार कभी मौसमे-बहार में था
उसी दरख्त का साया अभी बहुत कम है
मैं अपनी उम्र की तुझको दुआएं दूँ कैसे
मुझे खबर है मेरी ज़िन्दगी बहुत कम है
बदलते दौर की ज़द में है गुलसितां का निजाम
''ज़हीन'' फूलों में अब ताजगी बहुत कम है
Ref : असरे क़लम
Tuesday, March 31, 2009
buniyad hussain ''zaheen'' bikaneri ki shayyiri
लोग ये कहते थे इक लम्बा सफ़र है ज़िन्दगी
मौत को देखा तो समझे मुख्तसर है ज़िन्दगी
खून से लिथड़ी हुई लाशें हैं देखो हर तरफ़
ज़ुल्म के इस दौर में फिर दांव पर है ज़िन्दगी
हिम्मतो - जुरअत ही से मिलता है मंजिल का सुराग़
हौसला जीने का हो तो राहबर है ज़िन्दगी
तेरे हर इक गाम पर हैं ठोकरें ही ठोकरें
क्या तुझे एहसास है; तुझको ख़बर है ज़िन्दगी
भूक; लाचारी; मुसीबत; मुफ़लिसी है मुल्क में
आज हम आज़ाद हैं और दर - ब - दर है ज़िन्दगी
क्या सुनाउं मैं तुम्हें टूटे दिलों की दास्ताँ
मुख्तलिफ़ राहों में इक तन्हा सफ़र है ज़िन्दगी
हाय ! किन आँखों से देखें हम ये मंज़र ऐ ''ज़हीन''
टूटती साँसें हैं और बे - बालो - पर है ज़िन्दगी
असरे - क़लम
buniyad hussain ''ज़हीन'' bikaneri
मौत को देखा तो समझे मुख्तसर है ज़िन्दगी
खून से लिथड़ी हुई लाशें हैं देखो हर तरफ़
ज़ुल्म के इस दौर में फिर दांव पर है ज़िन्दगी
हिम्मतो - जुरअत ही से मिलता है मंजिल का सुराग़
हौसला जीने का हो तो राहबर है ज़िन्दगी
तेरे हर इक गाम पर हैं ठोकरें ही ठोकरें
क्या तुझे एहसास है; तुझको ख़बर है ज़िन्दगी
भूक; लाचारी; मुसीबत; मुफ़लिसी है मुल्क में
आज हम आज़ाद हैं और दर - ब - दर है ज़िन्दगी
क्या सुनाउं मैं तुम्हें टूटे दिलों की दास्ताँ
मुख्तलिफ़ राहों में इक तन्हा सफ़र है ज़िन्दगी
हाय ! किन आँखों से देखें हम ये मंज़र ऐ ''ज़हीन''
टूटती साँसें हैं और बे - बालो - पर है ज़िन्दगी
असरे - क़लम
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