न फना मेरी न बका मेरी मुझे ऐ ! 'शकील' न ढूँढिये
मैं किसी का हुस्न-ए-ख्याल हूँ, मेरा कुछ वजूद-ए-अदम नहीं
nikala mujhko zannat se fareb-e-zindgi de kar.............. diya phir shaunq zannat ka ye hairani nahi jaati.......
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Saturday, June 6, 2009
shakeel ki shayyiri
कैसे कह दूँ की मुलाकात नहीं होती है
रोज़ मिलते हैं, मगर बात नहीं होती है
आप लिलाह न देखा करें आईना कभी
दिल का आ जाना, बड़ी बात नहीं होती है
हाल-ए-दिल पूछने वाले, तेरी दुनिया में कभी
दिन तो होता है, मगर रात नहीं होती है
जब भी मिलते हैं तो, कह्ते हैं की कैसे हो 'शकील'
इस से आगे तो, कोई बात नहीं होती है
रोज़ मिलते हैं, मगर बात नहीं होती है
आप लिलाह न देखा करें आईना कभी
दिल का आ जाना, बड़ी बात नहीं होती है
हाल-ए-दिल पूछने वाले, तेरी दुनिया में कभी
दिन तो होता है, मगर रात नहीं होती है
जब भी मिलते हैं तो, कह्ते हैं की कैसे हो 'शकील'
इस से आगे तो, कोई बात नहीं होती है
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