मेरे नदीम मेरे हमसफर, उदास न हो
कठिन सही तेरी मंजिल, मगर उदास न हो
कदम कदम पे चट्टानें खडी रहें, लेकिन
जो चल निकलते हैं दरिया तो फिर नहीं रुकते
हवाएं कितना भी टकराएँ आंधियां बनाकर,
मगर घटाओं के परछम कभी नहीं झुकाते
मेरे नदीम मेरे हमसफर .....
हर एक तलाश के रास्ते मैं मुश्किलें हैं, मगर
हर एक तलाश मुरादों के रंग लाती है
हजारों चाँद सितारों का खून होता है
तब एक सुबह फिजाओं पे मुस्कुराती है
मेरे नदीम मेरे हमसफर ....
जो अपने खून को पानी बना नहीं सकते
वो जिंदगी मैं नया रंग ला नहीं सकते
जो रास्ते के अंधेरों से हार जाते हैं
वो मंजिलों के उजालों को पा नहीं सकते
मेरे नदीम मेरे हमसफर, उदास न हो
कठिन सही तेरी मंजिल, मगर उदास न हो
nikala mujhko zannat se fareb-e-zindgi de kar.............. diya phir shaunq zannat ka ye hairani nahi jaati.......
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Friday, June 5, 2009
Friday, May 29, 2009
saahir ludhiyanwi ki shayyiri
तुम्हारी मस्त नज़र अगर इधर नही होती
नशे में चूर फिजा इस कदर नही होती
तुम्हीं को देखने की दिल में आरजू है
तुम्हारे आगे ही और ऊंची नज़र नही होती
ख़फा न होना अगर बढ़के थम लूँ दमन
ये दिल-फरेब खता जानकर नही होती
तुम्हारे आने तलक हमको होश रहता है
फिर उसके बाद हमें कुछ ख़बर नही होती
नशे में चूर फिजा इस कदर नही होती
तुम्हीं को देखने की दिल में आरजू है
तुम्हारे आगे ही और ऊंची नज़र नही होती
ख़फा न होना अगर बढ़के थम लूँ दमन
ये दिल-फरेब खता जानकर नही होती
तुम्हारे आने तलक हमको होश रहता है
फिर उसके बाद हमें कुछ ख़बर नही होती
saahir ludhiyanwi ki shayyiri
तेरा ख्याल दिल से मिटाया नही अभी
बेदर्द मैंने तुझको भुलाया नही अभी
कल तुने मुसकुरा के जलाया था ख़ुद जिसे
सीने में वो चराग बुझाया नही अभी
गर्दन को आज भी तेरे बाहों की याद है
चौखट से तेरी, सर को उठाया नही अभी
बेहोश हो के जल्द तुझे होश आ गया
मैं बदनसीब होश में आया नही अभी
बेदर्द मैंने तुझको भुलाया नही अभी
कल तुने मुसकुरा के जलाया था ख़ुद जिसे
सीने में वो चराग बुझाया नही अभी
गर्दन को आज भी तेरे बाहों की याद है
चौखट से तेरी, सर को उठाया नही अभी
बेहोश हो के जल्द तुझे होश आ गया
मैं बदनसीब होश में आया नही अभी
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