बोहत छोटी से बातों पर रूठना और मान जाना फिर
कोई जब तुमसे रूठेगा, मैं तुमको याद आउंगी
वो बातों में बोहत सख्ती मगर दिल मोम जैसा है
किसी लड़की को सोचोगे, तोह तुम को याद आउंगी
तो यूँ करना बरसते आसमां को देखना ही छोड़ देना तुम
के बदल जब भी बरसेगा, मैं तुमको याद आउंगी
तुम्हारा साथ ख्वहिश थी नहीं कोई थी मजबूरी
तन्हा जब कभी सड़कों पर चलोगे, तब भी याद आउंगी
मैं तुम में बस चुकी हूँ, जिस तरह मेहँदी है हाथों पर
ख़ुद अपनी जात को ढूंढोगे, तब भी याद आउंगी
तुम मेरी मुहब्बत हो और मैं तुम्हारी एक ज़रूरत हूँ
तुम मुझको जब बुलाओगे, मैं वापिस लौट आउंगी
nikala mujhko zannat se fareb-e-zindgi de kar.............. diya phir shaunq zannat ka ye hairani nahi jaati.......
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Saturday, June 6, 2009
serwat shah jaana ki shayyiri
जिन रास्तों से तुम आए हमारे दिल तक
उन रास्तों से किसी को गुजरने नहीं दिया
बैठी हूँ आज भी मैं वक्त थाम कर
मैंने उससे भी फ़ैसला करने नहीं दिया
इन् हाथों की लकीरों को इस तरह से रखा
हमने तुम्हारे नाम को मिटने नहीं दिया
कागज़ पर अपने दिल के लिखा तेरा नाम और
कलम तोड़ दिया और कुछ नया लिखने नही दिया
बारिश है, एक लड़की है और खुली सड़क
लेकिन तेरे ख्याल ने बिखेरने नहीं दिया
कोई तो है जिस की हर दुआ में मैं हूँ
इस एक गुमां ने मुझे मरने नहीं दिया
उन रास्तों से किसी को गुजरने नहीं दिया
बैठी हूँ आज भी मैं वक्त थाम कर
मैंने उससे भी फ़ैसला करने नहीं दिया
इन् हाथों की लकीरों को इस तरह से रखा
हमने तुम्हारे नाम को मिटने नहीं दिया
कागज़ पर अपने दिल के लिखा तेरा नाम और
कलम तोड़ दिया और कुछ नया लिखने नही दिया
बारिश है, एक लड़की है और खुली सड़क
लेकिन तेरे ख्याल ने बिखेरने नहीं दिया
कोई तो है जिस की हर दुआ में मैं हूँ
इस एक गुमां ने मुझे मरने नहीं दिया
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