Showing posts with label इंशा अल्लाह इंशा. Show all posts
Showing posts with label इंशा अल्लाह इंशा. Show all posts

Friday, May 22, 2009

insha khan insha ki shayyiri

कमर बांधे हुए चलने पे यां सब यार बैठे हैं
बोह्त आगे गए, बाक़ी जो हैं तैयार बैठे हैं
न छेड़ ए निकहत-ए-बाद-ए-बहारी, राह लग अपनी
तुझे अटखेलियां सूझी हैं, हम बेज़ार बैठे हैं
तसव्वुर अर्श पर है और सर है पा-ए-साक़ी पर
ग़र्ज़ कुछ और धुन में इस घड़ी मै-ख़्वार बैठे हैं
यह अपनी चाल है उफ़तादगी से इन दिनों पहरों
नज़र आया जहां पर साया-ए-दीवार बैठे हैं
भला गर्दिश फ़लक की चैन देती है किसे इंशा
ग़नीमत है कि हम सूरत यहां दो चार बैठे हैं

insha khan insha ki shayyiri

जो'फ आता है दिल को थाम तो लो
बोलीयों मत, मगर सलाम तो लो
कौन कहता है बोलो, मत बोलो
हाथ से मेरा एक जाम तो लो
इन्ही बातों पे लुटा हूँ मैं
गाली फिर दे के मेरा नाम तो लो
याक निगाह पर बिकेहैं "इंशा" आज
मुफ्त में मोल एक गुलाम तो लो

wel come