जलता हूँ हिज्र-ए-शाहिद-ओ-याद-ए-शराब में
शौक़-ए-सवाब ने मुझे डाला अजाब में
कह्ते हैं तुमको होश नही इज़तराब में
सारे गिले तमाम हुए एक जवाब में
पहली शमीम-ए-यार मेरे अश्क-ए-सुर्ख से
दिल को गज़ब फिशार हुआ पेच-ओ-ताब में
रहते हैं जमा कूचा-ए-जानां में खास-ओ-आम
आबाद एक घर है जहाँ-ए-ख़राब में
बदनाम मेरे गिरिया-ए-रुसवा से हो चुके
अब उज्र क्या रहा निगाह-ए-बेहिजाब में
मतलब की जुस्तजू ने ये क्या हाल कर दिया
हसरत भी नही दिल-ए-नाकामयाब में
नाकामियों से काम रहा उम्र भर हमें
पीरी में यास है जो हवस थी शबाब में
क्या जलवे याद आए के अपनी ख़बर नही
बे-बादा मस्त हु मैं शब्-ए-महताब में
पैहम सजूद पा-ए-सनम पर दम-ए-विदा
'मोमिन' खुदा को भूल गए इज़्तराब में
nikala mujhko zannat se fareb-e-zindgi de kar.............. diya phir shaunq zannat ka ye hairani nahi jaati.......
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Thursday, June 4, 2009
Tuesday, June 2, 2009
momin ki shayyiri
मार ही डाल मुझे चश्म-ए-अदा से पहले
अपनी मंजिल को पहुँच जाऊं कजा से पहले
इक नज़र देख लूँ आ जाओ कजा से पहले
तुमसे मिलने की तमन्ना है खुदा से पहले
हश्र के रोज़ मैं पूछूँगा खुदा से पहले
तुने रोका नहीं क्यूँ मुझको खता से पहले
अपनी मंजिल को पहुँच जाऊं कजा से पहले
इक नज़र देख लूँ आ जाओ कजा से पहले
तुमसे मिलने की तमन्ना है खुदा से पहले
हश्र के रोज़ मैं पूछूँगा खुदा से पहले
तुने रोका नहीं क्यूँ मुझको खता से पहले
Monday, June 1, 2009
momin ki shayyiri
उस नक्श-ए-पा[footprint] के सजदे ने किया क्या क्या ज़लील[humiliate]
कूचा-ए-रकीब में भी सर के बल गया
कूचा-ए-रकीब में भी सर के बल गया
Saturday, May 30, 2009
momin ki shayyiri
मैं एहवाल[कहानी]-ऐ-दिल मर गया कह्ते कह्ते
थके तुम न "बस, बस, सुना !" कह्ते कह्ते
मुझे चुप लगी मुद्दा कह्ते कह्ते
रुके हैं वो जाने क्या कह्ते कह्ते
ज़बान गन्ग[dumb] है इश्क में गोश कर है
बुरा सुनते सुनते भला कह्ते खेते
शब्-ए-हिज्र में क्या हजूम-ए-बाला है
ज़बान थक गई मरहबा कह्ते कह्ते
गिला हरजा-गर्दी का बेजा न था कुछ
वो क्यूँ मुस्कुराये बजा कह्ते कह्ते
सद[100] अफ़सोस जाती रही वस्ल की शब्
"ज़रा ठहर ऐ ! बेवफा" कह्ते कह्ते
चले तुम कहाँ मैंने तोह दम लिया था
फ़साना दिल-ए-जार का कह्ते कह्ते
सितम हाय ! गर्दूं मुफस्सिल न पूछो
के सर फिर गया माजरा कह्ते कह्ते
नहीं या सनम 'मोमिन' अब कुफ्र से कुछ
के खु हो गई है सदा कह्ते कह्ते
थके तुम न "बस, बस, सुना !" कह्ते कह्ते
मुझे चुप लगी मुद्दा कह्ते कह्ते
रुके हैं वो जाने क्या कह्ते कह्ते
ज़बान गन्ग[dumb] है इश्क में गोश कर है
बुरा सुनते सुनते भला कह्ते खेते
शब्-ए-हिज्र में क्या हजूम-ए-बाला है
ज़बान थक गई मरहबा कह्ते कह्ते
गिला हरजा-गर्दी का बेजा न था कुछ
वो क्यूँ मुस्कुराये बजा कह्ते कह्ते
सद[100] अफ़सोस जाती रही वस्ल की शब्
"ज़रा ठहर ऐ ! बेवफा" कह्ते कह्ते
चले तुम कहाँ मैंने तोह दम लिया था
फ़साना दिल-ए-जार का कह्ते कह्ते
सितम हाय ! गर्दूं मुफस्सिल न पूछो
के सर फिर गया माजरा कह्ते कह्ते
नहीं या सनम 'मोमिन' अब कुफ्र से कुछ
के खु हो गई है सदा कह्ते कह्ते
Friday, May 22, 2009
momin ki shayyiri
जाँ ना खा, वस्ल-ए-ऊद[दुश्मन] सच ही सही, पर कया करूँ
जब गिला करता हूँ हमदम, वेह कसम खा जाये है
जब गिला करता हूँ हमदम, वेह कसम खा जाये है
Saturday, May 16, 2009
momin ki shayyiri
असर उसको ज़रा नहीं होता
रंज राह्तफ़ज़ा नहीं होता
तुम हमारे किसी तरह न हुए
वरना दुनिया में क्या नहीं होता
नारसाई से दम रुके तो रुके
मैं किसी से ख़फ़ा नहीं होता
तुम मेरे पास होते हो गोया
जब कोई दूसरा नहीं होता
हाल-ए-दिल यार को लिखूं क्यूं कर
हाथ दिल से जुदा नहीं होता
दामन उसका जो है दराज़ तो हो
दस्ते आशिक़ रसा नहीं होता
किसको है ज़ौक़-ए-तल्ख़्कामी लैक
जंग बिन कुछ मज़ा नहीं होता
चारा-ए-दिल सिवाए सब्र नहीं
सो तुम्हारे सिवा नहीं होता
क्यों सुने अर्ज़-ए-मुज़्तर ऐ मोमिन
सनम आख़िर ख़ुदा नहीं होता
Thursday, April 30, 2009
momin ki shayyiri
गैर के हमराह वोह आता है मैं हैरान हूँ
किसके इस्तिकबाल[welcome] को जी तन से मेरा जाये है
किसके इस्तिकबाल[welcome] को जी तन से मेरा जाये है
momin ki shayyiri
मेरी फरियाद सुन कहता है इस्राफील[फरिश्ता] हैरत से
क़यामत आ गई क्यूँकर, यें गुल कैसा ज़मीं पर है
क़यामत आ गई क्यूँकर, यें गुल कैसा ज़मीं पर है
Tuesday, April 28, 2009
momin ki shayyiri
तू कहाँ जायेगी कुछ अपना ठिकाना कर ले
हम तो कल ख्वाबे-अदम[shortage] में शबे-हिज्राँ होंगे
हम तो कल ख्वाबे-अदम[shortage] में शबे-हिज्राँ होंगे
Saturday, April 25, 2009
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