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Friday, May 29, 2009

faiz ahmed faiz ki shayyiri

नसीब आजमाने के दिन रहे हैं
करीब उनंके आने के दिन रहे हैं
जो दिल से कहा है जो दिल से सुना है
सब उनको सुनाने के दिन रहे हैं
अभी से दिल--जान सर--राह रख दो
के लुटने लुटाने के दिन रहे हैं
टपकने लगी उन् निगाहों से मस्ती
निगाहें चुराने के दिन रहे हैं
सबा फिर हमें पूछती फिर रही है
चमन को सजाने के दिन रहे हैं
चलो 'फैज़' फिर से कहीं दिल लगाये
सुना है ठिकाने के दिन रहे हैं

Friday, May 22, 2009

faiz ahmed faiz ki shayyiri

नसीब आजमाने के दिन आ रहे हैं
क़रीब उनके आने के दिन आ रहे हैं
जो दिल से कहा है, जो दिल से सुना है
सब उनको सुनाने के दिन आ रहे हैं
अभी से दिल-ओ-जाँ सर-ए-राह रख दो
कि लुटने लुटाने के दिन आ रहे हैं
टपकने लगी उन निगाहों से मस्ती
निगाहें चुराने के दिन आ रहे हैं
सबा फिर हमें पूछती फिर रही है
चमन को सजाने के दिन आ रहे हैं
चलो फैज़ फिर से कहीं दिल लगाएं
सुना है ठिकाने के दिन आ रहे हैं


Tuesday, May 19, 2009

faiz ki shayyiri

रंग पैराहन का, खुश्बू जुल्फ लहराने का नाम
मौसम-ए-गुल है तुम्हारे बाम पर आने का नाम
दोस्तों उस चश्म-ओ-लब की कुछ कहो जिसके बगैर
गुलिस्तान की बात रंगीन न मैखाने का नाम
फिर नज़र में फूल महके दिल में फिर शमा जली
फिर तसव्वुर ने लिया उस बज्म में जाने का नाम
मोह्तसिब की खैर, ऊंचा है उसी के नाम से
रिंद का, साकी का, मय का, खुम का, पैमाने का नाम
हम से कहते हैं चमन वाले गरीबान-ए-चमन
तुम कोई अच्छा सा रख लो अपने वीराने का नाम
फैज़ उनको है तकाजा-ए-वफ़ा हम से जिन्हें
आशना के नाम से प्यारा है बेगाने का नाम

Thursday, April 30, 2009

faiz ki shayyiri

फिर कोई आया दिल-ए-ज़ार, नहीं कोई नहीं
राहरव[मुसाफिर] होगा, कहीं और चला जाएगा
ढल चुकी रात, बिखरने लगा तारों का गुबार
लड़खडाने लगे एवानों में ख्वाबीदा चिराग़
सो गई रास्ता तक तक के हर एक रहगुज़र
अजनबी ख़ाक ने धुंधला दिए कदमों के सुराग़
गुल करो शम'एं, बढ़ाओ मय-ओ-मीना-ओ-अयाग़
अपने बेख्वाब किवाडों को मुकफ्फल[बंद] कर लो
अब यहाँ कोई नहीं , कोई नहीं आयेगा...

wel come