तोड़ना टूटे हुए दिल का बुरा होता है
जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा होता है
मांग कर तुमसे खुशी लूँ, मुझे मंजूर नहीं
किसका मांगी हुई दौलत से भला होता है
लोग नाहक किसी मजबूर को कह्ते हैं बुरा
आदमी अच्छे है पर वक्त बुरा होता है
क्यूँ "मुनीर" अपनी तबाही का ये कैसा शिकवा
जितना तकदीर में लिखा है अदा होता है
nikala mujhko zannat se fareb-e-zindgi de kar.............. diya phir shaunq zannat ka ye hairani nahi jaati.......
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Friday, June 5, 2009
Monday, June 1, 2009
muneer ki shayyiri
ग़म की बारिश ने भी तेरे नक्श को धोया नहीं
तुने मुझको खो दिया, मैंने तुझे खोया नहीं
नींद का हल्का गुलाबी सा खुमार आँखों में था
यूँ लगा जैसे वो शब् को देर तक सोया नहीं
हर तरफ़ दीवार-ओ-दर और उन् में आँखों के हुजूम
कह सके जो दिल की हालत वो लब-ए-गोया नहीं
जनता हूँ एक ऐसे शख्स को में भी ‘मुनीर’
ग़म से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं
तुने मुझको खो दिया, मैंने तुझे खोया नहीं
नींद का हल्का गुलाबी सा खुमार आँखों में था
यूँ लगा जैसे वो शब् को देर तक सोया नहीं
हर तरफ़ दीवार-ओ-दर और उन् में आँखों के हुजूम
कह सके जो दिल की हालत वो लब-ए-गोया नहीं
जनता हूँ एक ऐसे शख्स को में भी ‘मुनीर’
ग़म से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं
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