जाने वालों से रबता रखना
दोस्तों रस्म-ए-फातिहा रखना
घर कि तामीर चाहे जैसी हो
इस में रोने कि कुछ जगह रखना
मस्जिदें हैं नमाजियों के लिये
अपने घर में कहीं खुदा रखना
जिस्म में फैलने लगा है शहर
अपनी तन्हाइयां बचा रखना
उमर करने को है पचास को पार
कौन है किस जगह पता रखना
कभी किसी को मुकमल जहाँ नही मिलता
कहीं ज़मी तो कहीं आसमा नही मिलता
तेरे जहाँ में ऐसा नही की प्यार न हो
जहा उम्मीद हो इसकी वहां नही मिलता
बुझा सका है भला कौन वक्त के शोले
यह ऐसी आग है की जिस में धुआं नही मिलता
मुँह की बातें सुने हर कोई, दिल के दर्द को जाने कौन
आवाजों के बाजारों में खामोशी पहचाने कौन
सदियों सदियों वही तमाशा रास्ता रास्ता लम्बी खोज
लेकिन जब हम मिल जाते हैं, खो जाता है जाने कौन
वो मेरा आईना है मैं उसीकी परछाई हूँ
मेरे ही घर में रहता है, मुझ जैसा ही जाने कौन
किरण किरण हल्का सा सूरज, पलक पलक खुलती नींदें
यूँही दिल पिघल रहा है, ज़रा ज़रा जाने कौन
धुप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
ज़िन्दगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
वो सितारा है चमकने दो युही आंखों में
क्या ज़रूरी है उससे जिस्म बना कर देखो
पत्थरों में भी जुबा होती है, दिल होते हैं
अपने घर की दर-ओ-दीवार सजा कर देखो
फासला नज़रों का धोखा भी तोह हो सकता है
वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो
अब खुशी है न कोई ग़म रुलाने वाला
हमने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला
उस्सको रुखसत तोह किया था, मुझे मालूम न था
सारा घर ले गया, घर छोड़ के जाने वाला
इक मुसाफिर के सफर जैसी है सब की दुनिया
कोई जल्दी में, कोई देर से जाने वाला
एक बे-चेहरा सी उमीद है चेहरा-चेहरा
जिस तरफ़ देखिये आने को है आने वाला
जब किसी से कोई गिला रखना
सामने अपने आईना रखना
यूँ उजालो से वास्ता रखना
शमा के पास ही हवा रखना
घर की तामीर चाहे जैसी हो
इस में रोने की जगह रखना
मस्जिदें है नमाजियों के लिए
अपने घर में कहीं खुदा रखना
मिलना-जुलना जहाँ ज़रूरी हो
मिलने-जुलने का हौसला रखना