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Saturday, June 6, 2009

nida fazli ki shayyiri

जाने वालों से रबता रखना
दोस्तों रस्म-ए-फातिहा रखना
घर कि तामीर चाहे जैसी हो
इस में रोने कि कुछ जगह रखना
मस्जिदें हैं नमाजियों के लिये
अपने घर में कहीं खुदा रखना
जिस्म में फैलने लगा है शहर
अपनी तन्हाइयां बचा रखना
उमर करने को है पचास को पार
कौन है किस जगह पता रखना


nida fazli ki shayyiri

कभी किसी को मुकमल जहाँ नही मिलता
कहीं ज़मी तो कहीं आसमा नही मिलता
तेरे जहाँ में ऐसा नही की प्यार न हो
जहा उम्मीद हो इसकी वहां नही मिलता
बुझा सका है भला कौन वक्त के शोले
यह ऐसी आग है की जिस में धुआं नही मिलता

Friday, June 5, 2009

nida fazli ki shayyiri

मुँह की बातें सुने हर कोई, दिल के दर्द को जाने कौन
आवाजों के बाजारों में खामोशी पहचाने कौन
सदियों सदियों वही तमाशा रास्ता रास्ता लम्बी खोज
लेकिन जब हम मिल जाते हैं, खो जाता है जाने कौन
वो मेरा आईना है मैं उसीकी परछाई हूँ
मेरे ही घर में रहता है, मुझ जैसा ही जाने कौन
किरण किरण हल्का सा सूरज, पलक पलक खुलती नींदें
यूँही दिल पिघल रहा है, ज़रा ज़रा जाने कौन

Friday, May 29, 2009

nida fazli ki shayyiri

धुप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
ज़िन्दगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
वो सितारा है चमकने दो युही आंखों में
क्या ज़रूरी है उससे जिस्म बना कर देखो
पत्थरों में भी जुबा होती है, दिल होते हैं
अपने घर की दर-ओ-दीवार सजा कर देखो
फासला नज़रों का धोखा भी तोह हो सकता है
वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो

nida fazli ki shayyiri

अब खुशी है कोई ग़म रुलाने वाला
हमने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला
उस्सको रुखसत तोह किया था, मुझे मालूम था
सारा घर ले गया, घर छोड़ के जाने वाला
इक मुसाफिर के सफर जैसी है सब की दुनिया
कोई जल्दी में, कोई देर से जाने वाला
एक बे-चेहरा सी उमीद है चेहरा-चेहरा
जिस तरफ़ देखिये आने को है आने वाला

nida fazli ki shayyiri

जब किसी से कोई गिला रखना
सामने अपने आईना रखना
यूँ उजालो से वास्ता रखना
शमा के पास ही हवा रखना
घर की तामीर चाहे जैसी हो
इस में रोने की जगह रखना
मस्जिदें है नमाजियों के लिए
अपने घर में कहीं खुदा रखना
मिलना-जुलना जहाँ ज़रूरी हो
मिलने-जुलने का हौसला रखना

wel come