Friday, June 5, 2009

nida fazli ki shayyiri

मुँह की बातें सुने हर कोई, दिल के दर्द को जाने कौन
आवाजों के बाजारों में खामोशी पहचाने कौन
सदियों सदियों वही तमाशा रास्ता रास्ता लम्बी खोज
लेकिन जब हम मिल जाते हैं, खो जाता है जाने कौन
वो मेरा आईना है मैं उसीकी परछाई हूँ
मेरे ही घर में रहता है, मुझ जैसा ही जाने कौन
किरण किरण हल्का सा सूरज, पलक पलक खुलती नींदें
यूँही दिल पिघल रहा है, ज़रा ज़रा जाने कौन

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