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Thursday, May 21, 2009

zauk ki shayyiri

मैं भी पलकों पे सज़ा लूँगा लहू की बूंदे
तुम भी पाबस्ता--जंजीर[बंधे पैर] हिना हो जाना

Friday, April 17, 2009

zauk ki shayyiri

आदमीयत और शै है, इल्म है कुछ और शै
लाख तोते को पढाया पर वो हैवाँ ही रहा

wel come