करे कलाम[talk] जो मुझसे तो मेरे लहजे में
में चुप रहूँ तो मेरी तेवरों का साथी हो
वोह ख्वाब देखे तो देखे मेरे हवाले से
मेरे ख्याल के सब मंज़रों का साथी हो
nikala mujhko zannat se fareb-e-zindgi de kar.............. diya phir shaunq zannat ka ye hairani nahi jaati.......
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Monday, June 1, 2009
Friday, May 29, 2009
parvin shakir ki shayyiri
पा-बा-गिल सब हैं रिहाई की करे तदबीर कौन
दस्त-बसता शहर में खोले मेरी ज़ंजीर कौन
मेरा सर हाज़िर है लेकिन मेरा मुंसिफ देख ले
कर रहा है मेरे फर्द-ऐ-जुर्म को तहरीर कौन
मेरी चादर तोह छिनी थी शाम की तन्हाई ने
बे-रिदै को मेरी फिर दे गया ताशहीर कौन
नींद जब ख्वाबों से प्यारी हो तोह ऐसे अहद में
ख्वाब देखे कौन और ख्वाबों को दे ताबीर कौन
रेत अभी पिछले मकानों की न वापस आई थी
फिर लब-ऐ-साहिल घरौंदा कर गया तामीर कौन
सारे रिश्ते हिज्रतों में साथ देते हैं तोह फिर
शहर से जाते हुए होता है दामन-गीर कौन
दुश्मनों के साथ मेरे दोस्त भी आजाद हैं
देखना है खेंचता है मुझपे पहला तीर कौन
दस्त-बसता शहर में खोले मेरी ज़ंजीर कौन
मेरा सर हाज़िर है लेकिन मेरा मुंसिफ देख ले
कर रहा है मेरे फर्द-ऐ-जुर्म को तहरीर कौन
मेरी चादर तोह छिनी थी शाम की तन्हाई ने
बे-रिदै को मेरी फिर दे गया ताशहीर कौन
नींद जब ख्वाबों से प्यारी हो तोह ऐसे अहद में
ख्वाब देखे कौन और ख्वाबों को दे ताबीर कौन
रेत अभी पिछले मकानों की न वापस आई थी
फिर लब-ऐ-साहिल घरौंदा कर गया तामीर कौन
सारे रिश्ते हिज्रतों में साथ देते हैं तोह फिर
शहर से जाते हुए होता है दामन-गीर कौन
दुश्मनों के साथ मेरे दोस्त भी आजाद हैं
देखना है खेंचता है मुझपे पहला तीर कौन
Friday, May 22, 2009
parvin shakir ki shayyiri
टूटी है मेरी नींद मगर तुमको इससे कया
बजते रहें हवाओं से दर, तुमको इससे कया
तुम मौज मौज मिस्ले-सबा घूमते रहो
कट जाएं मेरी सोच के पर, तुमको इससे कया
औरों का हाथ थामो, उन्हें रस्ता दिखाओ
मैं भूल जाऊं अपना ही घर, तुमको इससे कया
अब्रे-गुरेज़पा[भगोड़े बादल] को बरसने से कया गरज़
सीपी में बन ना पायें गुहर[मोती] तुमको इससे कया
ले जाएं मुझको माले-गनीमत[लूट का माल] के साथ उदू[दुश्मन]
तुमने तो डाल दी है सिपर[हथियार] तुमको इससे कया
तुमने तो थक के दश्त में खेमे लगा लिए
तन्हा कटे किसी का सफ़र, तुमको इससे कया
बजते रहें हवाओं से दर, तुमको इससे कया
तुम मौज मौज मिस्ले-सबा घूमते रहो
कट जाएं मेरी सोच के पर, तुमको इससे कया
औरों का हाथ थामो, उन्हें रस्ता दिखाओ
मैं भूल जाऊं अपना ही घर, तुमको इससे कया
अब्रे-गुरेज़पा[भगोड़े बादल] को बरसने से कया गरज़
सीपी में बन ना पायें गुहर[मोती] तुमको इससे कया
ले जाएं मुझको माले-गनीमत[लूट का माल] के साथ उदू[दुश्मन]
तुमने तो डाल दी है सिपर[हथियार] तुमको इससे कया
तुमने तो थक के दश्त में खेमे लगा लिए
तन्हा कटे किसी का सफ़र, तुमको इससे कया
Thursday, April 30, 2009
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