छोड़ मत बहर-ए-करम, लोग कहाँ जायेंगे
ऐ शंशा-ए-सितम, लोग कहाँ जायेंगे
जाना चाहें भी अगर भाग के ए गेसू-दराज़
यह सलल बा-क़दम लोग कहाँ जायेंगे
हमको मुद्दत से ज़माने की ख़बर तक भी नहीं
उठ के इस बज्म से हम लोग कहाँ जायेंगे
किसी नादाँ पुजारी ने अगर यूँही बगावत करदी
तो भला फिर यह सनम लोग कहाँ जायेंगे