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Saturday, June 6, 2009

najma qamar ki shayyiri

मुझे नसीब हुआ उसके ध्यान में रहना
ज़मीन पे होते हुए आसमां में रहना
मैं जानती हूँ की वो मेरा हो नहीं सकता
मुझे पसंद है लेकिन गुमान में रहना
मुहब्बतों में जो दिल बेकरार हो जाएँ
उन्हें नसीब कहाँ इत्मीनान में रहना
किसी किसी को दिया मरतबा खुदा ने ये
किसी का होना किसी की अमन में रहना
मुझे नसीब हुआ उसके ध्यान में रहना
ज़मीन पे होते हुए आसमां में रहना

najma qamar ki shayyiri

मुझे किस्मतों के लिखे हुए से निकाल दे
मुझे हौसला, मुझे हिम्मत-ए-बेमिसाल दे
जो मिले हैं गम उन्हें रख सकों मैं संभल कर
मेरे दिल को इतना सुकून इतना कमाल दे
मेरे साथ रंगों का काफला रहे रात भर
मुझे ऐसी सुब्ह-ए-फिसाल दे तू मजाल दे
जिसे पी के दुनिया त्याग दूँ, तेरी होराहूँ
मुझे ऐसा तिलस्मी जैकूँ का सिआल दे
तू ने जो खुशी मुझे जब भिड़ी न थी दैरपा
मेरे गम की शाम-ए-सबात को भी ज़वाल दे
ऐ मेरे खुदा मेरे पाऊँ को भी ज़मीन दे
मुझे सफर करना है रेत पर मुझे सयेबान से निकाल दे

wel come