मुझे नसीब हुआ उसके ध्यान में रहना
ज़मीन पे होते हुए आसमां में रहना
मैं जानती हूँ की वो मेरा हो नहीं सकता
मुझे पसंद है लेकिन गुमान में रहना
मुहब्बतों में जो दिल बेकरार हो जाएँ
उन्हें नसीब कहाँ इत्मीनान में रहना
किसी किसी को दिया मरतबा खुदा ने ये
किसी का होना किसी की अमन में रहना
मुझे नसीब हुआ उसके ध्यान में रहना
ज़मीन पे होते हुए आसमां में रहना
nikala mujhko zannat se fareb-e-zindgi de kar.............. diya phir shaunq zannat ka ye hairani nahi jaati.......
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Saturday, June 6, 2009
najma qamar ki shayyiri
मुझे किस्मतों के लिखे हुए से निकाल दे
मुझे हौसला, मुझे हिम्मत-ए-बेमिसाल दे
जो मिले हैं गम उन्हें रख सकों मैं संभल कर
मेरे दिल को इतना सुकून इतना कमाल दे
मेरे साथ रंगों का काफला रहे रात भर
मुझे ऐसी सुब्ह-ए-फिसाल दे तू मजाल दे
जिसे पी के दुनिया त्याग दूँ, तेरी होराहूँ
मुझे ऐसा तिलस्मी जैकूँ का सिआल दे
तू ने जो खुशी मुझे जब भिड़ी न थी दैरपा
मेरे गम की शाम-ए-सबात को भी ज़वाल दे
ऐ मेरे खुदा मेरे पाऊँ को भी ज़मीन दे
मुझे सफर करना है रेत पर मुझे सयेबान से निकाल दे
मुझे हौसला, मुझे हिम्मत-ए-बेमिसाल दे
जो मिले हैं गम उन्हें रख सकों मैं संभल कर
मेरे दिल को इतना सुकून इतना कमाल दे
मेरे साथ रंगों का काफला रहे रात भर
मुझे ऐसी सुब्ह-ए-फिसाल दे तू मजाल दे
जिसे पी के दुनिया त्याग दूँ, तेरी होराहूँ
मुझे ऐसा तिलस्मी जैकूँ का सिआल दे
तू ने जो खुशी मुझे जब भिड़ी न थी दैरपा
मेरे गम की शाम-ए-सबात को भी ज़वाल दे
ऐ मेरे खुदा मेरे पाऊँ को भी ज़मीन दे
मुझे सफर करना है रेत पर मुझे सयेबान से निकाल दे
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