साया है कम खजूर के ऊंचे दरख्त का
उम्मीद बांधिए न बड़े आदमी के साथ
nikala mujhko zannat se fareb-e-zindgi de kar.............. diya phir shaunq zannat ka ye hairani nahi jaati.......
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Saturday, June 6, 2009
Saturday, May 30, 2009
kaif bhopali ki shayyiri
दाग दुनिया ने दिए ज़ख्म ज़माने से मिले
हमको ये तोहफे तुम्हें दोस्त बनाने से मिले
हम तरसते ही तरसते ही तरसते ही रहे
वो फलाने से फलाने से फलाने से मिले
ख़ुद से मिल जाते तोह चाहत का भरम रह जाता
क्या मिले आप जो लोगों के मिलाने से मिले
कैसे माने के उन्हें भूल गया तू ऐ 'कैफ'
उन्के ख़त आज हमें तेरे सरहाने से मिले
हमको ये तोहफे तुम्हें दोस्त बनाने से मिले
हम तरसते ही तरसते ही तरसते ही रहे
वो फलाने से फलाने से फलाने से मिले
ख़ुद से मिल जाते तोह चाहत का भरम रह जाता
क्या मिले आप जो लोगों के मिलाने से मिले
कैसे माने के उन्हें भूल गया तू ऐ 'कैफ'
उन्के ख़त आज हमें तेरे सरहाने से मिले
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