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Saturday, June 6, 2009

kaif bhopali ki shayyiri

साया है कम खजूर के ऊंचे दरख्त का
उम्मीद बांधिए न बड़े आदमी के साथ

kaif bhopali ki shayyiri

दिन भी गुज़रना है तड़प कर इस तरह
सो जा दिल-ए-हज़ीं के बोहत रात हो गई

Saturday, May 30, 2009

kaif bhopali ki shayyiri

दाग दुनिया ने दिए ज़ख्म ज़माने से मिले
हमको ये तोहफे तुम्हें दोस्त बनाने से मिले
हम तरसते ही तरसते ही तरसते ही रहे
वो फलाने से फलाने से फलाने से मिले
ख़ुद से मिल जाते तोह चाहत का भरम रह जाता
क्या मिले आप जो लोगों के मिलाने से मिले
कैसे माने के उन्हें भूल गया तू ऐ 'कैफ'
उन्के ख़त आज हमें तेरे सरहाने से मिले

wel come