Showing posts with label जिगर मुरादाबादी. Show all posts
Showing posts with label जिगर मुरादाबादी. Show all posts

Saturday, June 6, 2009

jigar Muradabadi ki shayyiri

पास-ए-अदब से छुप न सका राज़-ए-हुस्न-ओ-इश्क
जिस जन तुम्हारा नाम सुना, सर झुका लिया

Thursday, June 4, 2009

jigar Muradabadi ki shayyiri

साकी पर इल्जाम न आए
चाहे तुझ तक जाम न आए
तेरे सिवा जो की हो मुहब्बत
मेरी जवानी काम न आए
जिनके लिए मर भी गए हम
वो चल कर दो गाम न आए
इश्क का सौदा इतना गरां[difficult] है
इन्हें हमसे काम न आए
मैखाने में सब ही तो आए
लेकिन "जिगर" का नाम न आए

Monday, June 1, 2009

jigar Muradabadi ki shayyiri

वोह चीज़ कह्ते हैं फिरदोस[paradise]-ए-गुमशुदा जिस को
कभी कभी तेरी आंखों में पाई जाती है

Friday, May 29, 2009

jigar Muradabadi ki shayyiri

दास्ताँ-ऐ-ग़म-ऐ-दिल उन्को सुनाई न गई
बात बिगड़ी थी कुछ ऐसी की बनाई न गई
सबको हम भूल गए जोश-ऐ-जूनून में लेकिन
एक तेरी याद थी ऐसी की भुलाई न गई
इश्क पर कुछ न चला दीदार-ऐ-तर का जादू
उसने जो आग लगा दी वो बुझाई न गई
क्या उठाएगी सबा खाक़ मेरी उस डर से
ये क़यामत तोह ख़ुद उंनसे भी उठाई न गई

jigar Muradabadi ki shayyiri

बराबर से बचकर गुज़र जाने वाले
ये नाले नही बे-असर जाने वाले
मोहब्बत में हम तोह जीये हैं, जीयेंगे
वो होंगे कोई और, मर जाने वाले
मेरे दिल की बेताबिया भी लिए जा
दबे पाऊँ मुह फेर के जाने वाले
नही जानते कुछ की जाना कहाँ है
चले जा रहे हैं मगर जाने वाले
तेरे इक इशारे पे सआकित खड़े हैं
नही कह के सब से गुज़र जाने वाले

jigar Muradabadi ki shayyiri

इश्क को बेनकाब होना था
आप अपना जवाब होना था
तेरी आँखों का कुछ कसूर नही
हाँ, मुझी को ख़राब होना था
दिल की जिस पर है नक्श--रंग-रंग
उसको सदा किताब होना था
हमने नाकामियों को ढूंढ लिया
अखिराश कामयाब होना था

jigar Muradabadi ki shayyiri

दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं
कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं
दुनिया--दिल तबाह किए जा रहा हूँ मैं
सर्फ़--निगाह--आह किए जा रहा हूँ मैं
फर्द--अमल सियाह किए जा रहा हूँ मैं
रहमत को बेपनाह किए जा रहा हूँ मई
ऐसी भी इक निगाह किए जा रहा हूँ मैं
ज़र्रों को मेहर--माह किए जा रहा हूँ मैं
मुझसे लगे हैं इश्क की अज़मत को चार चाँद
ख़ुद हुस्न को गवाह किए जा रहा हूँ मैं
मासूमी--जमाल को भी जिस पे रश्क हो
ऐसे भी कुछ गुनाह किए जा रहा हूँ मैं
आगे कदम बढाये जिन्हें सूझता नही
रोशन चिराग--रह किए जा रहा हूँ मैं
तनकीद--हुस्न मसलहत--ख़ास--इश्क है
ये जुर्म गाह-गाह किए जा रहा हूँ मैं
गुलशन परस्त हूँ मुझे गुल ही नही अज़ीज़
काँटों से भी निबाह किए जा रहा हूँ मैं
यु ज़िन्दगी गुजार रहा हूँ तेरे बगैर
जैसे कोई गुनाह किए जा रहा हूँ मैं
मुझसे अदा हुआ है 'जिगर' जुस्तजू का हक
हर ज़र्रे को गवाह किए जा रहा हूँ मैं

jigar Muradabadi ki shayyiri

आंखों में बस के दिल में समां कर चले गए
ख्वाबीदा ज़िन्दगी थी जगा कर चले गए
चेहरे तक आस्तीन वो कर चले गए
क्या राज़ था की जिसको छिपाकर चले गए
राग-राग में इस तरह वो समां कर चले गए
जैसे मुझ ही को मुझसे चुराकर चले गए
आए थे दिल की प्यास बुझाने के वास्ते
इक आग सी वो और लगा कर चले गए
लब थार-थार के रह गए लेकिन वो 'जिगर'
जाते हुए निगाह मिला कर चले गए

Thursday, May 21, 2009

jigar Muradabadi ki shayyiri,

मेरे दिल में भी एक सूरत है पिनाहँ[छुपी हुई]
जो तू देख लेगा तो हैरान होगा

Thursday, May 7, 2009

jigar Muradabadi ki shayyiri

बयान हो ना सकी इबादत मुहब्बत की
तमाम उम्र हुई शर्हे-आरजू[व्याख्या] करते

Thursday, April 30, 2009

jigar Muradabadi ki shayyiri

इस्याँ[पाप] की ना हो सकी तकमील मुझसे आह
कया मुंह दिखाओं रहमते-परवरदिगार को

Tuesday, April 28, 2009

jigar Muradabadi ki shayyiri

चैन आता ही नही मुझको कफ़स से यारब
कया मेरी हस्रते परवाज़ ना जीने देगी

jigar Muradabadi ki shayyiri

गज़ब था आज गुलशन में यें हसरत-खेज़[निराशाजनक] नज़्ज़ारा
इधर बुलबुल का दम टूटा, उधर फ़स्ले बहार आई

jigar Muradabadi ki shayyiri

इक लफ्जे-मुहब्बत का अदना सा फ़साना है
सिमटे तो दिले-आशिक, फैले तो ज़माना है

jigar Muradabadi ki shayyiri

मुझसे काइम हैं जुनून की अज्मतें[greatness]
मैंने सहरा को 'जिगर' सहरा किया

Saturday, April 25, 2009

jigar Muradabadi ki shayyiri

उठती नही है आँख मगर उसके रु-ब-रु
नादीदा[अनदेखा] इक निगाह किये जा रहा हूँ मैं

jigar Muradabadi ki shayyiri

हस्ती के नुकात पूछता है
गाफिल तुझे अपनी भी खबर है

Friday, April 17, 2009

jigar Muradabadi ki shayyiri

होशो-हवास अपने सलामत रहे 'जिगर'
मंजिल से पूछ लूंगा कहाँ जा रहा हूँ मैं

jigar Muradabadi ki shayyiri

उनके जाते ही यें हैरत छा गई
जिस तरफह देखा किया, देखा किया

wel come