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Thursday, April 16, 2009

zubeen rahee ki shayyiri

ऐ फातमा के चैन तुझे देखने के बाद
कटती नहीं है रैन तुझे देखने के बाद
मीलता नहीं है चैन तुझे देखने के बाद
ऐ शहे मशर -कैन तुझे देखने के बाद
असगर से रोके वोली फरिश्तो की टोलीया
पथरा गए है नैन तुझे देखने ने के बाद
लव पर अली अली है ज़बा पर अली अली
हैदर के नूरे -ऐन तुझे देखने ने के बाद
रोते थे फूट-फूट कर जीन्नो बशर सभी
खंज़र तले हुसैन तुझे देखने के बाद
तेरे करम से होता है सीव्ते नबी शुरू
राही का लैन-दैन तुझे देखने के बाद

Wednesday, April 15, 2009

zubeen rahee ki shayyiri

में लीखु शाने करामत तेरी गोसे आज़म
काश मील जाये इज़ाज़त तेरी गोसे आज़म
सब से आला है बीलायत तेरी गोसे आज़म
दोनों आलम में है अज़मत तेरी गोसे आज़म
तुने अल्लाह की कुदरत से जीला-ऐ मुर्दे
तू है अल्लाह का कुदरत तेरी गोसे आज़म
ये मुझे माँ की दुआओं का असर लगता है
मील गई जो मुझे नीस्बत तेरी गोसे आज़म
इब्ने मरीयम सी जो बनती हुई हमसर देखी
बो करामत है करामत तेरी गोसे आज़म
बा खुदा मानी है मानी है बहुत शेताने
नहेरे दज़ला पे इबादत तेरी गोसे आज़म
खुद बा खुद मेरे बुलंदी ने कदम चूम लीये
हो गई जब से इनायत तेरी गोसे आज़म
बो तबंगर का तबंगर है ज़माने भर में
मील गई जीस को भी दोलत तेरी गोसे आज़म
फीक -रे उक्बा नहीं इस वास्ते राही को तेरे
दील के शीशे में है सूरत तेरी गोसे आज़म

Monday, April 13, 2009

zubeen rahee ki shayyiri

मेरी केसे ज़माने में शोहरत हुई
में तो कुछ भी नहीं - में तो कुछ भी नहीं
बा खुदा ये नवी की बदोलत हुई
में तो कुछ भी नहीं - में तो कुछ भी नहीं

आपने अपने हलके में अपना लीया
आपने अपने कदमो से lipta लीया
या हुसैन आप की ये इनायात हुई
में तो कुछ भी नहीं में तो कुछ भी नहीं

बस इसी बात पर में तो इतरा गया
बस इसी बात पर में तो इठला गया
माँ के कदमो तले मेरी जन्नत हुई
में तो कुछ भी नहीं में तो कुछ भी नहीं

मर्सीए नात मुझ से जो लीखबा लीये
क्या हकीकत बताऊ ज़माने को में
नन् ने असगर की नज़रे इनायात हुई
में तो कुछ भी नहीं में तो कुछ भी नहीं

राही केसे गुलामो में चाहत मीली
राही केसे सलामो में अज़मत मीली
शाहे करबल की ये तो करामत हुई
में तो कुछ भी नहीं में तो कुछ भी नहीं

zubeen rahee ki shayyiri


नजदी कुरान पड़ के न बाते फीज़ूल चुन
नजदी कुरान पड़ के न बाते फीज़ूल चुन
मैने रसूल चुन लीया तू भी रसूल चुन
मैने रसूल चुन लीया तू भी रसूल चुन

नाफेहेम क्यों कीताबो पे इतरा रहा है तू
नाफेहेम क्यों कीताबो पे इतरा रहा है तू
में तुझ से के रहा हू नवी के उसूल चुन
में तुझ से के रहा हू नवी के उसूल चुन

हुर ने कहा याजीद से आली मकाम चुन
हुर ने कहा याजीद से आली मकाम चुन
मैने इमाम चुन लीया तू भी इमाम चुन
मैने इमाम चुन लीया तू भी इमाम चुन

में सर जभी उठाऊंगा तेरे हुजूर से
में सर जभी उठाऊंगा तेरे हुजूर से
पहले हुसैन तू मुझे अपना गुलाम चुन
पहले हुसैन तू मुझे अपना गुलाम चुन

zubeen rahee ki shayyiri

सब से नीराला सब से ही बेहेतर बना दीया
नीस्वत ने तेरी मेरा मुकद्दर बना दीया
हीरा बना दीया कही गोहर बना दीया
हर कादरी गुलाम को बेहेतर बना दीया
मैने जीबी झुकाई खुदा तेरे सामने
तूने मेरी जीबी को मुनब्बर बना दीया
में के रहा हू तेरे ही कदमो को चूम कर
कतरे को छूके तू ने समंदर बना दीया
जब से मीली है खाके कदम मुझको पीर की
तारीखीऔ में मुझको मुनब्बर बना दीया
कदमो ने मेरे पीर के हर एक वक्त का
में के रहा हू मुझको सीकंदर बना दीया
मुर्शीद ने अपनी चश्मे इनायात के फेज़ से
राही मेरे नसीव को वर्तर बना दीया

zubeen rahee ki shayyiri

मेरी आखों के तसब्बुर में है सूरत तेरी
ये मोहोब्बत है इनायत है अकीदत तेरी
तू ने हर शख्स को दीबना बना रख्खा है
दोरे काबा में भी होती जरुरत तेरी
तेरी निसबत ने मिलाया है मुझे मालिक से
ये हकीकत है हकीकत है हकीकत तेरी
मैने जिस दिन तसब्बुर में तुझे देखा है
ज़र्रे ज़र्रे में नज़र आती है सूरत तेरी
राही तो कुछ भी नहीं कुछ भी नहीं कुछ भी नहीं
माँ की खिदमत से मिली है राही को निसबत तेरी

गोसे आज़म की शान में ( ज़ुबीन राही )

zubeen rahee ki shayyiri

यही जिक्र जिक्रे तमाम हे बो हुसैन हे बो हुसैन
जो इमाम इबने इमाम हे बो हुसैन हे बो हुसैन

ये ज़मी कहे ये फ़लक कहे
यही बात जिन्नो बशर कहे
जो कलामे रब्बे कलाम हे बो हुसैन हे बो हुसैन हे

ये बड़े यकीन की बात हे
के शहीद और भी हे मगर
जो शहीदे आज़म नाम हे बो हुसैन हे बो हुसैन हे

बहा भूख से बहा प्यास से
बहा जान से बहा आल से
रखा जिसने हक़ का निज़ाम हे बो हुसैन बो हुसैन हे

बा खुदा खुदा की हर एक शे
दो जहा में देखो यकीन से
पड़े जिसपे लाखो सलाम हे बो हुसैन बो हुसैन हे

मेरा सीना चीर के देखलो
मेरे दिल में कोन हे जलबागर
बना राही जिसका गुलाम हे बो हुसैन हे बो हुसैन हे

zubeen rahee ki shayyiri

खाके करबल की बात क्या कहेना !
आले अहमद की ज़ात क्या कहेना !!
सेर :- दीने अहमद ने जिंदिगी पाई !
दस मोहर्रम की रात क्या कहेना !!
सेर:- तपता सेहेरा बना दिया जन्नत !
इब्ने हेदार की बात क्या कहेना !!
सेर:- यादे सरबर में आई आखों में
आसुओं की बारात क्या कहेना !!
सेर :- कर्बला के तबील सजदे में !
झुक गई कायनात क्या कहेना !!
सेर:- अज़्मते दीं बचाई सजदे ने !
सजदे की बात क्या कहेना !!
सेर :- कदमे शब्बीर ने बदल डाली !
कर्बला की सिफात क्या कहेना !!
मखता :- बज़्मे मेराज भी सज गई राही !
आज की चाँद रात क्या कहेन

zubeen rahee ki shayyiri

शुज़ूदे शोके मोहोम्मद जो तूल हो जाये
मुझे यकीन है रहमत नुज़ूल हो जाये
इस एहतमाम से करना सबाल आका से
न कोई बात ज़बा से फुज़ूल हो जाये
ये मेरे दिल की तमन्ना है ये ही हसरत है
ये मेरा जिस्म मदीने की धूल हो जाये
pado नमाज़ pado मोमिनों नमाज़ pado
न जाने कोन सा सजदा कुबूल हो जाये
जो गुज़रे इश्के नबी में हयात राही की
कसम खुदा की तो कीमत बसूल हो जाये

zubeen rahee ki shayyiri

राहे हक में हक के निज़ाम को शाहे कर्बला ने बचा लिया
बा खुदा खुदा के कलाम को शाहे कर्बला ने बचा लिया
मिटा जा रहा था जहान से बहा नाम दीने रसूल का
लहु दे के दीन के नाम को शाहे कर्बला ने बचा लिया
न अज़ान होती कभी कही न नमाज़ होती कभी कही
हें ये सच के फरज़े तमाम को शाहे कर्बला ने बचा लिया
कभी बे ज़बान के खून से कभी नो ज़बान के खून से
बा खुदा दरुदो सलाम को शाहे कर्बला ने बचा लिया
बड़ी तेज कुफ्र की आंधिया चली राही फिर भी ये देखिये
के चरागे मस्जिदे आम को शाहे कर्बला ने बचा लिया

wel come