Monday, April 13, 2009

zubeen rahee ki shayyiri

राहे हक में हक के निज़ाम को शाहे कर्बला ने बचा लिया
बा खुदा खुदा के कलाम को शाहे कर्बला ने बचा लिया
मिटा जा रहा था जहान से बहा नाम दीने रसूल का
लहु दे के दीन के नाम को शाहे कर्बला ने बचा लिया
न अज़ान होती कभी कही न नमाज़ होती कभी कही
हें ये सच के फरज़े तमाम को शाहे कर्बला ने बचा लिया
कभी बे ज़बान के खून से कभी नो ज़बान के खून से
बा खुदा दरुदो सलाम को शाहे कर्बला ने बचा लिया
बड़ी तेज कुफ्र की आंधिया चली राही फिर भी ये देखिये
के चरागे मस्जिदे आम को शाहे कर्बला ने बचा लिया

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