Monday, April 13, 2009

zubeen rahee ki shayyiri

यही जिक्र जिक्रे तमाम हे बो हुसैन हे बो हुसैन
जो इमाम इबने इमाम हे बो हुसैन हे बो हुसैन

ये ज़मी कहे ये फ़लक कहे
यही बात जिन्नो बशर कहे
जो कलामे रब्बे कलाम हे बो हुसैन हे बो हुसैन हे

ये बड़े यकीन की बात हे
के शहीद और भी हे मगर
जो शहीदे आज़म नाम हे बो हुसैन हे बो हुसैन हे

बहा भूख से बहा प्यास से
बहा जान से बहा आल से
रखा जिसने हक़ का निज़ाम हे बो हुसैन बो हुसैन हे

बा खुदा खुदा की हर एक शे
दो जहा में देखो यकीन से
पड़े जिसपे लाखो सलाम हे बो हुसैन बो हुसैन हे

मेरा सीना चीर के देखलो
मेरे दिल में कोन हे जलबागर
बना राही जिसका गुलाम हे बो हुसैन हे बो हुसैन हे

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