तुम कहती हो मुझे फुलों से प्यार है
मगर जब फूल खिलते हैं
उन्हें टहनी से तोड़ डालती हो
तुम कहती हो मुझे बारिशों से प्यार है
मगर जब बारिश होती है
तो छुप जाती हो
तुम्केहती हो मुझे हवाओं से प्यार है
मगर जब हवा चलती है तो
खिड़कियाँ बंद कर लेती हो
फिर उस वक़त मैं
खोफज़दा सा हो जाता हूँ
जब तुम ये कहती हो
मुझे तुमसे प्यार है...!
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