Wednesday, March 18, 2009

अब भी ये निगाहे ...तेरी असीर[बंदी] तो है ...
तू नहीं है तो क्या हुवा.. तेरी तस्वीर तो है

मुजे इल्म है तेरा घोसला कही और है मगर
ये तो सच है की तू मेरी जान का ताईर[पंछी-bird] तो है

हमें देखते ही ....वो पलखे ज़ुका लेती है
शायद उसकी निगाहों में ..हमारी कोई तौकीर[इज्जत ] तो है

कव्वो की तरह चोट को नोचती है ...ये दुनिया
चलो कीसी काम में यहाँ के लोग माहिर तो है...

जिसके होटों को चूमेगी.. उसीके जान की बला बन जायेगी
ये मय भी तेरी ही तरह ....काफिर तो है ...

यु ही नहीं मिलता ''बादल''...कोई बार बार बेइख्तियार ..
हो न हो .उसके हाथो में मेरी कोई लकीर तो है

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