इलाही क्यूँ नही उठती क़यामत,माजरा कया है
हमारे सामने पहलु में वो दुश्मन के बैठे हैं
निगाहें शोख-ओ-चश्म-ए-शौक़ में दरपर्दा छुपती है
कि वो चिलमन में हैं,नज़दीक हम चिलमन के बैठे हैं
किसी की शामत आएगी,किसी की जान जायेगी
किसी की ताक में वो बाम[खिड़की]पर बन-ठन के बैठे है
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