Tuesday, March 17, 2009

हम ही ठहरे सज़ावर और खता कुछ भी नहीं ...
तू कया समझता है तेरे बाद हुआ कुछ भी नहीं ...
याद जब आई, तेरी आई और रहा कुछ भी नहीं ...
दिल ने बस आह भरी और कहा कुछ भी नहीं ...
वक़त कि तरह ये साँसें भी रवां हैं अब तक ...
इक बस अश्क थमे और रुका कुछ भी नहीं ...
हाथ से हाथ छुडा कर गया जब से तू ...
मैंने उस वक़त से इन हाथों से छुआ कुछ भी नहीं ...
काश तू मुझसे कह दे अचानक आ कर,,,
के तेरे बाद मेरे जीवन में बचा कुछ भी नहीं ... !!!

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