कहीं से बोलता कोई नहीं है !
तो बस्ती में भी कया कोई नहीं है ?
मेरा जी तुझसे भी भरने लगा है !
अगरचे दूसरा कोई नहीं है ?
कई सदियो कि दूरी दर्मियाँ है !
बजाहिर फांसला कोई नहीं है !
मैं सहरा में सदाएँ दे रहा हूँ !
मेरा भी हमनवा कोई नहीं है !
कुतबखानों में अब रख दो हमें भी !
हमें भी देखता कोई नहीं है !
सभी के दम घुटे जाते हैं लेकिन
खिड़कियाँ खोलता कोई नहीं है !
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