हमसे तकसीर मुक़दर के सितारे न हुए
जिंदगी आप थे और आप हमारे न हुए
फिर बताओ के भला किस पे सितम धाओगे
शहर-ए-उल्फत में अगर दर्द के मारे न हुए
ज़र्द आँखों से मेरी, हिज्र के मोती बरसे
ये भी कया कम है मुहबत में खसारे न हुए
सच तो ये है के बिना उसके गुज़ारा जीवन
ये भी सच है के बिना उसके गुज़ारे न हुए
इस लिए अपना मिलन हो भी नहीं सकता था
एक, दरिया के कभी दोनों किनारे न हुए
कच्चे धागे तो किसी के भी सहारे न हुए
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