सब का एहसान उठाने की ज़रूरत कया है
साथ तुम हो तोः ज़माने की ज़रूरत कया है
दिल से तय कर के किसी रोज़ अल्लग हो जाओ
छोड़ना है तोः बहाने की ज़रूरत कया है
कया हुआ उस से जो पहले सा ताल्लुक ना रहा
शहर को छोड़ के जाने की ज़रूरत कया है !
मसला दोनों का है तै भी करेंगे दोनों
शहर को बीच में लाने की ज़रूरत कया है
ख्वाहिशें दिल से निकल आयें तोः हैरत कैसी
इन् परिंदों को ठिकाने की ज़रूरत कया है
फूल को शोर मचाते कभी देखा है 'कमर'
तुम हो खुसबू तोः बताने की ज़रूरत कया है ?
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