दर्द का हद से गुज़रना तोह अभी बाकी है
टूट कर मेरा बिखरना तोह अभी बाकी है
पास आके मेरा दुःख-दर्द बाटनेवाले
मुझसे कतरा के गुज़रना तोह अभी बाकी है
चाँद शेरों में कहाँ ढलती है एहसास की आग
ग़म का ये रंग निखारना तोह अभी बाकी है
रंग-ऐ-रुसवाई सही, शहर की दीवारों पर
नाम 'राशिद' का उभारना तोह अभी बाकी है
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