Friday, May 29, 2009

unknown

इक बेवफा से प्यार करके पछता रहे है हम
उससके इंतज़ार में जी रहे है मर रहे है हम
कितना तावील है ये जिंदगी का तन्हा सफर
जब कोई हमराह हो तोह कटता नही सफर
हर कदम इक बोझ सा लगता है बार बार
बढ़ता नही कदम मेरा मंजिल की और
थक हार कर बैठ गए राहगुज़र पे हम
जाते हुए मुसाफिर को तकते है हसरत से हम
कोई तोह आई हाथ बधाई ले जाए मंजिल की और
दिल से मेरे गुबार हटाये आंसुओं को पोंछे और
पूछे मेरा हाल--जार और तनहाइयों का राज़
दे आसरा हमें एयर दे प्यार बेशुमार
ज़प्त--ग़म का सिला और मरहम लगाये कोई
ज़ख्म--दिल को सीए और ग़म से नजात दिलाये
करता हूँ इंतज़ार रोज़ उस हसीन लम्हें का मैं
जब लौट के आए बेवफ्फा अपने 'इश्क' के पास

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