इक बेवफा से प्यार करके पछता रहे है हम
उससके इंतज़ार में जी रहे है न मर रहे है हम
कितना तावील है ये जिंदगी का तन्हा सफर
जब कोई हमराह न हो तोह कटता नही सफर
हर कदम इक बोझ सा लगता है बार बार
बढ़ता नही कदम मेरा मंजिल की और
थक हार कर बैठ गए राहगुज़र पे हम
जाते हुए मुसाफिर को तकते है हसरत से हम
कोई तोह आई हाथ बधाई ले जाए मंजिल की और
दिल से मेरे गुबार हटाये आंसुओं को पोंछे और
पूछे मेरा हाल-ऐ-जार और तनहाइयों का राज़
दे आसरा हमें एयर दे प्यार बेशुमार
ज़प्त-ऐ-ग़म का सिला और मरहम लगाये कोई
ज़ख्म-ऐ-दिल को सीए और ग़म से नजात दिलाये
करता हूँ इंतज़ार रोज़ उस हसीन लम्हें का मैं
जब लौट के आए बेवफ्फा अपने 'इश्क' के पास
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