आँख में आये जो पानी दिल में रहे तो आग
जो भी गये जल जाए यह प्यार है ऐसा राग
ऐ दिल तेरी आहों में असर है की नही
जो दिल इधर है वो उधर है के नही
दिल मह-ए-बाब की मानिद है बेताब
इस दर्द भरी शब् की सहर है की नही
जिनके लिए रातें मेरी बे-ख्वाब हुई हैं
उन्को मेरे गम की ख़बर है के नही
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