Friday, June 5, 2009

ehsaan ki shayyiri

क्या क्या बातें वोह अपनी तहरीर में लिखती है
एक मयी तकदीर मेरी तकदीर में लिखती है
वोह ऐसी हमदर्द के अपने प्यार के सारे अल्फाज़
मेरे हाथों की एक एक लकीर में लिखती है
कोई राज़ छुपाना शायद पसंद नही उससे
वोह अपना हर ख्वाब खुली ताबीर में लिखती है
मैं उसका एक मन चाह कैदी हूँ इसी लिए
नाम मेरा वोह जुल्फों की ज़ंजीर में लिखती है
बोल उठे एक एक ता'अस्सुर उसके चेहरे से
सारी कहानी वोह अपनी तस्वीर में लिखती है
खूब चहकती है वो ख़त के पहले हिस्से में
लेकिन दिल की सच्ची बात आखिर में लिखती है
जिस खूबी से पहचाना जाए कोई शख्स "एहसान"
कुदरत वोह खूबी उसके खून-ए-खमीर में लिखती है

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