जिंदा था तो किसी ने न पूछा हालत-ए-जिगर
अब मर गए हैं तो मिटटी में दबाने आ गए
छोड़ के दुनिया को मदहोश हुए थे हम
वो नजाने क्या सोच कर हमको जगाने आ गए
न-जाने किस से पूछा है वफ़ा ने पता मेरा
मेरी क़बर पे भी हमको जगाने आ गए
हम अंधेरे में सोने के आदी थे
और वो बेवफा मेरी क़बर पर दिया जलाने आ गए
जिंदा था तो एक नज़र न देखा प्यार से 'फ़रज़'
मर गए हैं तो अब क़बर पर आंसू बहने आ गए
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