Monday, June 8, 2009

faraz ki shayyiri

पानी में आँख भर कर लाया जा सकता है
अब भी जलता शहर बचाया जा सकता है
एक मोहब्बत और वोह भी नाकाम मोहब्बत
लेकिन इस से काम चलाया जा सकता है
दिल पर पानी पीने आती है उमीदें
इस चश्मे में ज़हर मिलाया जा सकता है
मुझ गुमनाम से पूछते हैं फरहाद-ओ-मजनू
इश्क में कितना नाम कमाया जा सकता है
यह महताब ये रात की पेशानी की घाव
ऐसा ज़ख्म तो दिल पे खाया जा सकता है
फटा पुराना ख्वाब है मेरा फिर भी "फ़रज़"
इस में अपना आप छुपाया जा सकता है

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