Saturday, June 6, 2009

unknown

चलो ख्वाब आंखों में सज़ा कर देखते है.........
चलो हम किसी और को अपना बना कर देखते है .........
खून के रिश्तो से एतबार तो उठ गया ..........
चलो बेनाम रिश्ते बना कर देखते है ........
जिन्दगी आसान हो जाए शायद हमारी .........
चलो हाथ कि लकीरें को मिटता कर देखते है ......
अँधेरी शब् तो किसी सूरत कटती नही....
चलो घर अपना जला कर देखते है........
हमें मालूम है कि तुम्हे हमारा नही होना......
चलो तुमपर यह जिन्दगी लूटा कर देखते है......

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