मोहब्बत मैं कभी दो राये का इमकान नहीं होता
यह होती है तो होती है
नहीं होती
तो जितना भी जतन करलो, नहीं होती
कोई अच्छा अगर लग जाये
तो सब खामियां उसकी
अचानक खूबियों की ओधनी मैं छुप सी जाती हैं
ज़माना लाख समझाये
संभाल जाओ, पलट आओ
समात और बसारत को सुझाई कुछ नहीं देता
संभालने का कोई इस राह मैं सामान नहीं होता
मोहब्बत मैं कभी दो राये का इमकान नहीं होता
यह होती है तो होती है
नहीं होती
तो जितना भी जतन करलो, नहीं होती
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