तुम इतनी भी मगरूर नही जितना बना रखा है
मैंने सौ बार दिल को आजमा रखा है
तू मेरी है न कभी होगी.....बहुत मुशकिल है
मैं चाहता हूँ तो क्या और भी चाहते होंगे
नाम ऐसे ही तेरा जैसे सब ने......सजा रखा है
मैं तो कहता हूँ किसी के हो जाओ.....जाना
गुजरी बातों को क्यों दिल से लगा रखा है
अब अली उन् को भी एहसास की चादर दे दो
जिसके आने से हुरूँ ने गिला रखा है
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