Saturday, June 6, 2009

unknown

सर्द कली रातों की सरसराहट है कभी
कभी गर्म जज्बातों की शिद्दत है ये
जूनून है, मौसिकी है, बहुत पाक इबादत है ये........
हर किसी को मयस्सर नही, शौक़-ए-मोहब्बत है ये .........

कभी मस्जिदों की अजान कभी मंदिरों की आरती
किसी गुरद्वारे की अरदास है या गिरिजे की जियारत है ये.......

हर किसी को मयस्सर नही, शौक़-ऐ-मोहब्बत है ये..........

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