Monday, November 24, 2008

insha allah khan ki shayyiri

ये बातें झूठी बातें हैं, जो लोगो ने फेलाई हैं
तुम "इंशा" जी का नाम ण लो, कया "इंशा" जी सौदाई हैं !
हैं लाखो लोग जमाने मैं, क्यूं इश्क है रुसवा बेचारा
हैं और भी वजहें वहशत की, इंसान को रखती दुखियारा
हाँ ! बेकल बेकल रहता है, हो प्रीत मैं जिस ने दिल हारा
पर शाम से लेकर सुबह तक, यूँ कौन फीरे है आवारा !
गर इश्क किया है तो कया है, क्यूं शाद नहीं आबाद नहीं !
जो जान भी उफ्वाद नहीं, जो जान लिए बिन ताल ण सके
ये ऎसी भी उफ्वाद नहीं, ये बात तो तुम भी मानोगे
वह किस नहीं, फरहाद नहीं, कया हिजर का दारु मुश्किल है !
कया वस्ल के लम्हे याद नहीं, जो हमसे कहो हम करते हैं
कया इंशा को समझाना है ! उस लड़की से भी हम कह लेंगे
ये कुछ और ज़माना है, या छोडो या तकमील करो
ये इश्क है या अफसाना ! ये कैसा गोरखा-धंधा है !
ये कैसा ताना-बाना है ! ये बातें झूठी बातें है
ये लोगो ने फेलाई हैं,,,,,,,,,

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wel come