Wednesday, March 18, 2009

aamir ki shayyiri

आज की रात भी गुज़री है मेरी, कल की तरह
हाथ आये न सितारे तेरे, आँचल की तरह
रात जलती हुई इक ऐसी चिता है जिस पर
तेरी यादें है सुलगते हुए, संदल की तरह
तू इक दरिया है मगर मेरी तरह प्यासा है
मैं तेरे पास चला आऊँगा, बादल की तरह
मैं हूँ इक ख्वाब मगर जलती आँखों का 'अमीर'
आज भी लोग गँवा दें न मुझे, कल की तरह
हाथ आये न सितारे तेरे, आँचल की तरह

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