Wednesday, March 18, 2009

इस दर्द की कोई और दावा न थी !
मौत मांगने के सिवा कोई और दुआ न थी !!

तेरा खुद से इस तरह बिछडा जाना !
इस से बढ़ कर कोई और सजा न थी !!

वो उम्मीद के चराघ जाने क्यों भुझ गए !
इस कदर तो ताजी हवा न थी !!

तेरी चाहत को दिल में बसने से पहेले !
ज़िन्दगी इस कदर रुसवा न थी !!

हम अपनी वफ़ा की हद पार कर गये मगर !
तेरे दिल में कोई वफ़ा न थी ....!!

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wel come