बुत-शिकन(idol breaking) कोई कहीं से भी न होने पाए
हमने कुछ बुत अभी सीने में सजा रखे हैं
अपनी यादों में बसा रखा हैं
दिल पे ये सोच के पथराऔ(पत्थर फेंकना) करो दीवानों
के यहाँ हमने सनम अपने छुपा रखे हैं
बुत जो टूटे तो किसी तरह बना लेंगे उन्हें
टुकड़े-टुकड़े सही दामन में उठा लेंगे उन्हें
फिर से उजडे हुए सीने में सजा लेंगे उन्हें
गर खुदा टूटेगा हम तो न बना पायेंगे
तुम उठा लो तो उठा लो शायद
तुम बना लो तो बना लो शायद
तुम बनाओ तो, खुदा जाने बनाओ कैसा !
गर अपने जैसा ही बनाया तो क़यामत होगी
प्यार होगा न ज़माने में मुहबत होगी
दुश्मनी होगी, अदावत होगी
हमसे उसकि ना इबादत होगी
वहशते-बुत-शिकनी देख कर हैरान हूँ मैं
बुत-परस्ती मेरा शेवा(profession) है के इंसान हूँ मैं
एक ना एक बुत तो हर दिल में छुपा होता है
उसके सौ नामो में से एक नाम खुदा होता है
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